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सत्यार्थी को मिले अवॉर्ड को जयपुर में किया सेलिब्रेट

7 वर्ष पहले
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नोबेलपुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के अाश्रम से जुड़े ओमप्रकाश गूजर ने बुधवार को इस अवाॅर्ड की खुशी को जयपुरवासियों के साथ सेलिब्रेट किया। इस मौके पर अपने अनुभव पत्रकारों से शेअर किए।

आश्रमसे मिली नई जिंदगी : उन्होंनेबताया 1999 से मैं गुरुजी (कैलाश सत्यार्थी) के आश्रम में रह रहा हूं। उन्होंने मुझे पिता के समान पाला-पोसा। मेरे जैसे और भी कई करीब बच्चे उनके आश्रम में शिक्षा ले रहे हैं। आश्रम शुरू करने से पहले उन्होंने विराट नगर के सभी गांव, ढा़णियों और कस्बों में सर्वे किया था। तब पता चला कि बच्चे पढ़ने लिखने की उम्र में खेतों में काम कर रहे हैं। तब उन बच्चों के माता-पिता को समझा-बुझाकर आश्रम ले आए। यहां 6 महीने तक पढ़ाई और स्किल डवलपमेंट की ट्रैनिंग दी गई। उसके बाद बच्चों को घर भेज दिया जाता है, ताकि बाकी की शिक्षा बच्चे स्कूलों में ले सकें, लेकिन मैं घर नहीं गया। यहीं आश्रम में रुककर आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की। उसके बाद मैं आश्रम से हमेशा के लिए बाकी गांवों के बच्चों को शिक्षा दिलवाने के कार्य में जुड़ गया। वर्तमान में भी आश्रम के लिए काम कर रहा हूं। गौरतलब है कि ओमप्रकाश को बालश्रम अभियान के तहत 2006 में इंटरनेशनल चिल्ड्रन पीस प्राइज भी मिल चुका है। वे पूर्णिमा यूनिवर्सिटी से बीसीए कर रहे हैं।

स्काइपपर मलाला से होती है बात : अक्सरहमारी बात मलाला यूसुफजई से होती रहती है। लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में वे क्या कर रही हैं, इसके बारे में चर्चा करती हैं। राजस्थान में शिक्षा, चाइल्ड मैरिज, बालश्रम आदि विषयों पर ही बात करती हैं।

एक समारोह में कैलाश सत्यार्थी के साथ ओमप्रकाश गूजर।