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थोक महंगाई पांच साल में सबसे कम

7 वर्ष पहले
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थोकमहंगाई लगातार तीसरे महीने गिरते हुए अगस्त में 3.74 फीसदी पर पहुंच गई। यह पांच साल में सबसे कम है। अक्टूबर 2009 में थोक महंगाई 1.8 फीसदी दर्ज की गई थी। खाद्य वस्तुओं के दाम में गिरावट से यह संभव हो सका है। जुलाई में खाद्य महंगाई 8.43 फीसदी थी जो अगस्त में घटकर 5.15 फीसदी रह गई। यह जनवरी 2012 के बाद न्यूनतम स्तर है। अगस्त में खुदरा महंगाई भी जुलाई के 7.96 फीसदी से कम होकर 7.8 फीसदी हो गई थी। पिछले महीने सब्जियों के दाम में 4.88 फीसदी गिरावट आई। प्याज तो 44.7 फीसदी सस्ती हो गई। हालांकि आलू में तेजी रही। अगस्त में इसके दाम 61.61 फीसदी बढ़ गए। आलू जुलाई में भी 46.41 फीसदी महंगा हुआ था। फल 20.31 फीसदी महंगे हुए। ईंधन और ऊर्जा वर्ग में मुद्रास्फीति 4.54 फीसदी रही, जो जुलाई में 7.40 फीसदी थी।

मुंबई। रिजर्वबैंक गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि ब्याज दरों में तत्काल कटौती नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ खाद्य वस्तु नहीं बल्कि दूसरी चीजों के दाम भी ऊंचे हैं। सबके दाम में कमी आने पर ही ब्याज दरों में कमी की जा सकती है। दरें घटाने की उद्योगों की मांग पर राजन ने कहा एक तरफ तो वे दाम बढ़ा रहे हैं, दूसरी तरफ ब्याज घटाने की मांग कर रहे हैं। फिक्की के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ब्याज दरें एक सेकंड के लिए भी ऊंची रखने की मेरी कोई ख्वाहिश नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी ब्याज कम होने पर महंगाई फिर सिर उठा सकती है। रिजर्व बैंक ने जनवरी 2015 तक 8 फीसदी और जनवरी 2016 तक 6 फीसदी खुदरा महंगाई का लक्ष्य रखा है।

नई दिल्ली। थोकमहंगाई पांच साल के न्यूनतम स्तर पर जाते ही उद्योग जगत ने रिजर्व बैंक से ब्याज दरों में कटौती की मांग शुरू कर दी है। आरबीआई 30 सितंबर को अगली मौद्रिक नीति समीक्षा करेगा। पीएचडी चैंबर के अध्यक्ष शरद जयपुरिया ने कहा कि उद्योग ऊंची ब्याज दर के साथ महंगे कच्चे माल की समस्या से जूझ रहे हैं। इन्हें विकास के रास्ते पर लाने के लिए रेपो रेट में कटौती जरूरी है। एसोचैम महासचिव डीएस रावत ने कहा कि आरबीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उद्योगों के लिए पूंजी की लागत कम हो। सीआईआई महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार ने कई कदम उठाए हैं जिनसे आगे भी महंगाई कम रहने की उम्मीद है। अब रिजर्व बैंक को ब्याज कम करना चाहिए।