पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बांसुरी से छलका गायकी का रस

बांसुरी से छलका गायकी का रस

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सिटी रिपोर्टर जवाहरकला केंद्र की गुरुवारीय संगीत सभा में इस बार मुंबई के र|ाकर त्रिपाठी का बांसुरी वादन हुआ। बंशी बजैया हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य र|ाकर द्वारा बजाई गई बंदिशों के भाव कुछ इस तरह के थे कि सुनने वालों को बांसुरी की धुन से गायकी की अनुभूति हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने श्रृंगार रस की रचना- ऐरी आज पिया सपने में आए... से की। मध्य लय तीन ताल की यह बंदिश तोड़ी थाट के राग मधुवंती पर आधारित थी। उन्होंने इस बंदिश को स्वरों के छोटे-छोटे समूहों से सजाया और छंदकारी से राग की चंचल प्रकृति जीवंत कर दी।

उनके वादन में तानों का प्रभाव भी सुनने योग्य था। उन्होंने शृंगारिक और सपाट तानों के जरिए अपनी संगीत साधना का परिचय दिया।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में उन्होंने मिश्र पहाड़ी में लोक धुन प्रस्तुत की। कार्यक्रम का समापन उन्होंने लोकप्रिय भजन- पायोजी मैंने राम रतन धन पायो... बजाकर किया। इस भजन से संपूर्ण परिवेश आध्यात्मिक रंग में रंग गया। उनके साथ तबले पर जयपुर के वरिष्ठ तबला वादक निसार हुसैन ने संगत की। निसार ने उपज अंग से अनेक रोचक तिहाइयों के जरिए श्रोताओं की वाहवाही लूटी