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भ्रूण जांच मामले में रेडियोलॉजिस्ट की जमानत अर्जी खारिज

7 वर्ष पहले
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कम्पाउंडर ने कराया किसी और डॉक्टर से ऑपरेशन, मामला दर्ज

शहरके निजी अस्पताल के कम्पाउंडर ने एक डॉक्टर के नाम से दूसरे डॉक्टर के पास मरीज का ऑपरेशन करा दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की तबीयत खराब हुई तो मामले का खुलासा हुआ। पीड़ित ने आरोपी कम्पाउंडर के खिलाफ बजाज नगर थाने में रिपोर्ट की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

धोखाधड़ी के शिकार श्रीपाल ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले कान में तकलीफ होने उसने डॉ. लवलीश जैन को दिखाया था। उन्होंने दवाइयों का एक पर्चा दिया, जिसमें कम्पाउंडर कमलेश शर्मा का मोबाइल नंबर था। जब श्रीपाल ने उस नंबर पर फोन किया तो कमलेश ने डॉ. लवलीश को दिखाने के लिए कहा। कमलेश ने श्रीपाल को मालवीय नगर में राजस्थान ईएनटी हॉस्पिटल बुलाया, लेकिन वहां डॉ. लवलीश के नाम से डॉ. ललित सैनी ने उसके कान का ऑपरेशन किया। कुछ दिन बाद जब डॉ. लवलीश एक शिविर में पहुंचे, तो वहां श्रीपाल ने गलत तरीके से ऑपरेशन करने की जानकारी दी। इस पर डॉ. लवलीश ने बताया कि वे उस कम्पाउंडर को कई महीने पहले हटा चुकी हैं और उन्होंने यह ऑपरेशन नहीं किया। इस पर श्रीपाल थाने में शिकायत करने गया।

जयपुर| हाईकोर्टने सिंघाना (झूंझुनू) के इंदू अल्ट्रा साउंड सोनोग्राफी सेंटर पर पीसीपीएनडीटी निरीक्षण के दौरान भ्रूण लिंग जांच में पकड़े डॉ.योगेश कुमार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। विशिष्ट शासन सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवाएं) नवीन जैन ने बताया कि 22 जून 2014 को पीसीपीएनडीटी सेल ने डॉ.योगेश को गर्भवती महिलाओं के भ्रूण लिंग परीक्षण कर एएनएम दलालों को कमीशन दिए जाने के मामले का खुलासा किया था। पीसीपीएनडीटी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के अनुसंधान अधिकारी मदनलाल शर्मा ने बताया कि जांच में डॉ.योगेश कुमार ने दिल्ली के हरी नगर स्थित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में सरकारी सेवा में रहते हुए दिल्ली राजस्थान के 12 निजी सेंटरों पर सोनोग्राफी की पुष्टि हो चुकी है और दूसरे राज्यों में जांच जारी है।