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राज्यपाल के अभिभाषण में सत्ता विपक्ष की कंट्रोवर्सी

7 वर्ष पहले
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एसेंबली रिपोर्टर . जयपुर | राज्यपालके अभिभाषण के दौरान सत्ता और प्रतिपक्ष की ओर से अलग-अलग दावे किए गए। सत्ता पक्ष ने कहा कि मौजूदा और भाजपा के पिछले कार्यकाल में काम हुए, तो कांग्रेस की ओर से कहा गया कि उनके कार्यकाल में काम हुए। इसी बहस के बीच कार्यवाही शाम 5:38 बजे सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

प्रद्युम्नजी.. ता-उम्र सीखने की होती है..

भाजपाके विधायक शंकरसिंह ने बहस के दौरान कहा, गहलोत सरकार के अंतिम डेढ़ साल में अनाप-शनाप घोषणाओं का भ्रष्टाचार हुआ। ऐसे शब्दों को पकड़ कर कांग्रेस नेता प्रद्युम्नसिंह बोले, भ्रष्टाचार तो कई सुने हैं, ये घोषणाओं में भ्रष्टाचार नहीं सुना। सदस्य बताएं कि गहलोत ने घोषणाओं से ही भ्रष्टाचार कैसे किया? शंकरसिंह शब्दों को संभाल रहे थे कि घनश्याम तिवाड़ी बोले, प्रद्युम्न जी, ता-उम्र सीखने की होती है। अब तक आपने नहीं सीखा तो अब इनसे सीख लीजिए। इस पर शंकरसिंह बोले, घोषणाओं के बिलों में भ्रष्टाचार हुआ। यह सदन हंसी नहीं रोक पाया। सिंह बोले ही जा रहे थे। सभापति को कहना पड़ा.. क्या कहना चाहते हो.. तथ्यात्मक और स्पष्ट बोलो।

राजनीतिसे ऊपर उठकर बोले सदस्य

कुछसदस्यों ने राजनीति से ऊपर उठकर भी बातें कीं। डग विधायक रामचंद्र सुनारीवाल ने कहा कि सरकारों के कामकाज में अच्छे-बुरे कामों की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सरकार का पक्ष लेते हुए स्पष्ट किया कि उनके जिले में कई बड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के साथ कई नए पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुए। बानसूर विधायक शकुंतला रावत ने कहा कि सरकार ने चुनावों के लिए शैक्षणिक योग्यता तो लागू कर दी लेकिन कमजोर वर्ग को शिक्षित करने के बाद इसे लागू करते तो अच्छा होता। कांग्रेस के रमेश मीणा ने बिजली दरों की वृद्धि और स्वाइन फ्लू से हुई मौतों का मुद्दा उठाया। राजेंद्र सिंह भादू ने इंदिरा गांधी नहर में नालों की टूटफूट का मुद्दा उठाया। बायतू से कैलाश चौधरी, फलौदी से पब्बाराम ने बहस में भाग लेते हुए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।

राणीचालीसा पढ़ने पर भी मंत्री नहीं

बहसके दौरान विपक्ष के मुख्य सचेतक गोविंदसिंह डोटासरा अपने विधायकों को उसका रहे थे कि स्वाइन फ्लू और बिजली के मुद्दे को जोर से उठाओ। इतने में सरकारी मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर बोले, डोटासरा जी ऐसे ही बोलते रहो। कुछ नहीं तो नेता प्रतिपक्ष तो बन ही जाओगे। डोटासरा बोले, हम तो बन जाएंगे। आप मंत्री क्यों नहीं बने? राणी चालीसा जारी रखो। फिर भी मंत्री नहीं बनोगे? इस पर कालूलाल कुछ सहमे और राजेंद्र राठौड़ की ओर मुखातिब होकर बोले, मैं तो मंत्री से ऊपर हूं।