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पदोन्नति मूल अधिकार, लेकिन कम अनुभवी को वरीयता देना गलत : हाईकोर्ट

6 वर्ष पहले
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हाईकोर्टने सहायक कृषि अधिकारी पद पर पदोन्नति के मामले में कहा है कि पदोन्नति मूल अधिकार है, लेकिन कम अनुभवी को वरीयता देना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश मनीराम ढाका अन्य की याचिकाएं खारिज करते हुए दिया।

अदालत ने कहा कि प्रार्थियों को भर्ती के समय पता था कि वे सैंकंडरी के समान है और यह भी पता था कि पदोन्नति के लिए इंतजार करना होगा। ऐसे में मामले में कोई भेदभाव नहीं किया है और प्रार्थी चाहें तो सरकार को प्रतिवेदन दे सकते हैं, लेकिन कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता। याचिका में कृषि पर्यवेक्षक पद से सहायक कृषि अधिकारी पद की पदोन्नति में दस साल के कार्य अनुभव की शर्त को चुनौती दी थी। इसके अलावा कृषि पर्यवेक्षकों की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अलग से वरीयता सूची बनाने की गुहार की थी। अदालत ने कहा कि सरकार ने 1 अप्रैल 1991 से नियमों में संशोधन कर दिया है और पदोन्नति के लिए बीएससी वाले कृषि पर्यवेक्षकों के लिए पांच साल और सैकंडरी वालों के लिए दस साल का कार्य अनुभव का प्रावधान है। ऐसे में कम अनुभवी को पदोन्नति को वरीयता नहीं दी जा सकती।