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राजस्थान भूिम अर्जन विधेयक पेश तरीके पर तिवाड़ी को आपत्ति

7 वर्ष पहले
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विधानसभा संवाददाता . जयपुर | विधानसभामें बुधवार को राजस्थान भूमि अर्जन िवधेयक पेश किया गया। इसे पेश करने के प्रावधान पर विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस तरीके से यह पेश किया गया है, नियमों के अनुसार यह सही नहीं है। तिवाड़ी ने कहा कि यहां सदन में जो विधेयक पेश किया गया है, क्या वह केंद्रीय कानून की धाराओं में संशोधन है। या फिर यह केंद्रीय कानून से अलग कोई विधेयक है। उन्होंने कहा, उनका यह व्यवस्था का प्रश्न है कि इसकी धाराओं में संशोधन किया जाना है तो वे कौन-कौन सी धाराएं हैं, उनके सभी सेक्शन का उल्लेख यहां पेश किए जाने के साथ लिखकर किया जाना चाहिए था। यदि केंद्रीय कानून से अलग विधेयक लाया जा रहा है तो हम संसद को सुपरसीड करने का प्रयास कर रहे हैं। यानी संसद के अधिकारों पर अतिक्रमण कर रहे हैं, क्योंकि जिसके लिए संसद में 10 साल तक चर्चा चली, बहस चली और उसके बाद वह विधेयक लाया गया और अब इसे राजस्थान विधानसभा में लाया जा रहा है। इनमें से कौनसी स्थिति है, इसे केवल स्पष्ट किया जाना चाहिए, बल्कि कार्य सलाहकार समिति की बैठक में फिर से विचार कर इसे स्पष्ट करते हुए यहां पेश किया जाना चाहिए। तिवाडी की बात पर विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को ऐसी ही स्थिति में पेश करने की अनुमति दे दी।

जहां बारिश नहीं, वहां गिरदावरी के आदेश

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने विधानसभा में घोषणा की कि प्रदेश में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक गिरदावरी की जाएगी। जिन गोशालाओं की रिपोर्ट तहसीलदारों के माध्यम से चुकी है, उन्हें शीघ्र ही अनुदान जारी कर दिया जाएगा। कटारिया ने शून्यकाल में सांचौर विधायक सुखराम विश्नोई ने अपने क्षेत्र के 30 गांवों में अकाल की स्थिति घोषित करने की बात की थी। इस पर कटारिया ने कहा कि वर्षा की कमी को देखते हुए सरकार ने एक सितंबर से पहले ही प्रयास शुरू कर दिए थे। सितंबर के पहले सप्ताह में बारिश के कारण 7 सितंबर से शुरू करवाने का निर्णय किया गया। वर्षा जारी रहने के कारण हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक गिरदावरी के आदेश दिए गए हैं। हाल ही हुई वर्षा के बाद दो-तीन जिले ही ऐसे हैं, जहां वर्षा औसत से कम रही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो गोशालाएं अकाल से प्रभावित हैं उन्हें अनुदान दिया जाएगा।