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दूसरे प्रांतों के सस्ते स्टील ने बढ़ाई परेशानी
सरकारी विभागों की ओर से खरीद बंद करने से परेशान स्थानीय स्टील उद्योग के लिए दूसरे प्रांतों से आने वाला सस्ता स्टील समस्या पैदा कर रहा है। इससे स्थानीय स्टील इकाइयों की सेहत लगातार खराब हो रही है। प्रदेश की स्टील इकाइयां स्थापित क्षमता का 50 से 55 फीसदी ही उपयोग कर पा रही हैं। ऐसे में 10,000 करोड़ रुपए का निवेश और हजारों लोगों का रोजगार दांव पर है। स्थानीय स्टील उद्योग को बचाने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) समेत सरकारी परियोजनाओं के लिए स्थानीय इकाइयों से स्टील खरीद फिर शुरू करने और दूसरे प्रांतों से आने सस्ते स्टील को रोकने के लिए प्रवेश कर की सख्ती से वसूली की मांग की रही है।
उद्यमियों का कहना है कि एक अगस्त, 2012 को पीडब्ल्यूडी ने स्थानीय इकाइयों से स्टील खरीद पर रोक लगा दी थी। जबकि इनकी ओर से उत्पादित स्टील की 40 फीसदी खपत सरकारी परियोजनाओं में ही थी। इस वजह से स्थानीय इकाइयां स्थापित क्षमता से कम उत्पादन को मजबूर हुई। निजी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए मध्यप्रदेश और पश्चिमी बंगाल से स्टील मंगवाने की प्रवृत्ति बढ़ने से स्थानीय इकाइयों के लिए 55 फीसदी से ज्यादा क्षमता का उपयोग करना मुश्किल हो गया। स्टील पर चार फीसदी प्रवेश कर है, लेकिन इसकी वसूली सख्ती से नहीं हो रही है। प्रदेश में दो फीसदी सीएसटी पर ही स्टील मंगाया जा रहा है। इससे दूसरे प्रांतों का स्टील स्थानीय इकाइयों के स्टील के मुकाबले करीब 1000 रुपए टन सस्ता पड़ता है। अभी प्रदेश में मांग का करीब 25 फीसदी स्टील दूसरे प्रांतों से रहा है।
स्टील उद्योग को प्रोत्साहन की दरकार
रियलएस्टेट क्षेत्र में स्टील की कमजोर मांग को देखते हुए राज्य सरकार को स्थानीय इकाइयों से स्टील खरीद फिर शुरू करने पर विचार करना चाहिए। सरकारी खरीद बंद होने से प्रदेश में करीब 20 छोटी रोलिंग मिलें बंद हो गई है। हालात में सुधार नहीं हुआ तो बड़ी इकाइयों को चलाना भी मुश्किल हो जाएगा। -सीतारामअग्रवाल, अध्यक्ष,राज. स्टील चैंबर
स्क्रैपमहंगा होने से मार्जिन खत्म हुआ
सारेसमीकरण स्टील उद्योग के विपरीत है। इस वजह से प्रदेश की करीब 125 बड़ी स्टील इकाइयां बीमार होने की हालत में है। स्क्रैप महंगा होने से स्टील इकाइयों का मार्जिन लगभग समाप्त हो गया है। इससे स्टील उद्योग बुरे दौर से गुजर रहा है। -विनोदगुप्ता, एमडी,श्री कृष्णा र