डीजल सस्ता पर लो-फ्लोर से सफर महंगा
तीन महीने पहले पास बनता था 700 रुपए में, अब इसके लिए खर्च करने पड़ रहे हैं 1100 रुपए
जेसीटीएसएल
जयपुरसिटीट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (जेसीटीएसएल) के मासिक पास की रेट का स्लैब यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। पहले से पास बनवाते रहे यात्री स्लैब देखकर हैरान हैं। डीजल सस्ता होने के बावजूद जेसीटीएसएल का मासिक किराया पास महंगा हो गया है। यात्रियों को आठ महीने पहले लो फ्लोर बसों का मासिक पास 300 रुपए सस्ता मिल रहा था, जबकि उस समय डीजल वर्तमान रेट से करीब 10 रुपए महंगा था। अब डीजल दस रुपए सस्ता हो गया तो मासिक पास 200 से 300 रुपए अधिक देने पड़ रहे हैं।
^वर्तमान में मासिक पास में कोई वृद्धि नहीं की है। कंपनी ने अगस्त माह में किराया में वृद्धि की थी, उस समय ही मासिक पास में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन मासिक पास बनना बंद हो गया था। अब फरवरी माह से मासिक पास शुरू किए गए हैं। इसलिए उन्हें महंगा लग रहा है। -नरेशकुमार शर्मा, एमडी, जेसीटीएसएल
2 लाख यात्री करते हैं सफर
शहरमें कंपनी करीब 300 एसी-नॉन एसी बसों का संचालन कर रही है। इन बसों में प्रति दिन 2 लाख यात्री सफर कर रहे हैं। इनमें 213 बसें नॉन एसी, 59 एसी और 28 मिनी बसें शामिल हैं।
जून में मासिक पास और डीजल की रेट
घाटेमें चल रही जेसीटीएसएल ने जून माह में सरकार की ओर से फंड नहीं मिलने पर अधिकांश लो फ्लोर बसें बंद कर दी थीं। बसों की कमी के कारण मासिक पास भी बंद हो गए थे। मई में कंपनी शहर के लिए 700 और शहर-ग्रामीण में चलने वाली बसों के 1100 रुपए में पास बना रहे थे। लेकिन अब फरवरी माह से 900 और 1400 रुपए कर दिए पास से एसी-नॉन एसी दोनों तरह की बसों में सफर कर सकते हैं। इसी प्रकार 1 जून को डीजल की रेट 60.02 रुपए थी, वर्तमान में 10 रुपए सस्ता हो कर 50.77 रुपए हो गया है।
जयपुर|आरटीओ ने16 हजार वाहन संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। इसमें ऐसे वाहन शामिल हैं, जो बाहरी राज्यों से खरीदे गए हैं, लेकिन उनका यहां रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। बाहरी राज्यों के नंबर वाले वाहनों का राज्य में रजिस्ट्रेशन नहीं होने से विभाग को प्रतिमाह लाखों रु. रेवन्यू का नुकसान हो रहा है। आरटीओ ने 8 टीम बनाईं। सभी की रिपोर्ट आने के बाद वाहनों की संख्या का पता चला है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार प्रदेश में 30 दिन से अधिक वाहन रहने पर यहां के नंबर लेना अनिवार्य है। इसमें केंद्र सरकार और सैन्य अफसरों और कर्मचारियों को दो साल की छूट है।
^नोटिस जारी करने के बाद वाहन संचालक ऑफिस में जानकारी लेने रहे हैं। अधिकांश ने टैक्स और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। जिसने नहीं की उन्हें फिर से नोटिस जारी किए जाएंगे। -वी.पी.सिंह, आरटीओ