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कोर्ट में बीसलपुर पेयजल प्रोजेक्ट के संविदाकर्मियों की याचिका खारिज

6 वर्ष पहले
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हाईकोर्टने बीसलपुर पेयजल प्रोजेक्ट में 15 साल से भी ज्यादा समय से कार्यरत संविदाकर्मियों को नियमित करने की गुहार नहीं मानते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि संविदाकर्मियों की सेवाओं को नियमित नहीं किया जा सकता और संविदा खत्म होने के साथ ही सेवाएं भी खत्म हो जाती हैं। न्यायाधीश बेला एम.त्रिवेदी ने यह आदेश हनुमंत सिंह 23 अन्य की याचिका खारिज करते हुए दिया। याचिका में कहा कि वे पिछले 15 साल से बीसलपुर पेयजल आपूर्ति प्रोजेक्ट में काम कर रहे है। ऐसे में राज्य सरकार को अदालत निर्देश दे कि वह उन्हें पंप ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन, फिटर हेल्पर सहित अन्य पदों पर न्यूनतम वेतनमान पर नियमित करे। वहीं सरकारी अधिवक्ता सौरभ सारस्वत ने कहा कि सरकार ने नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी से बीसलपुर से अजमेर केकड़ी में पानी की सप्लाई का करार किया था। उसने ही प्रार्थियों को संविदा पर रखा था। ऐसे में तो सरकार ने इन्हें नियुक्ति दी है और ये सरकार के अधीन कर्मचारी हैं। सरकार सड़क निर्माण सहित अन्य काम भी संविदा पर कराती है, लिहाजा प्रार्थी नियमित नहीं हो सकते।