friday theatre
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कुरीतियाें पर प्रहार है नाटक सफेद ज्वारा
सिटी रिपोर्टर जयपुर
जवाहरकला केंद्र के फ्राइडे थिएटर में इस बार गणगौर परंपरा पर आधारित नाटक ‘सफेद ज्वारा’ का मंचन किया गया। नाटक में राजस्थान के प्रमुख लोक पर्व गणगौर एवं शीतला अष्टमी को नृत्य एवं प्रसंगों के माध्यम से दिखाते हुए समाज में फैली कुरीतियों पर प्रकाश डालने की सफल कोशिश की गई। नाटक का लेखन एवं निर्देशन युवा रंगकर्मी अनिल मारवाड़ी ने किया। अनिल जयपुर थिएटर में लोक परंपराओं पर नाटकों के लेखन और निर्देशन के लिए पहचाने जाते हैं। वे इन दिनों हाल ही में राजकीय पशु घोषित किए गए ऊंट पर भी नाटक तैयार कर रहे हैं।नाटक में जीवितेश शर्मा, हर्षा शर्मा, नयना शर्मा, रानू सनाढ्य, राही भारद्वाज, गरिमा शर्मा, मनोज स्वामी, गजेंद्र सिंह, जीतेन्द्र शर्मा, ओमप्रकाश सैनी, पुनीत झाझडिय़ा, निखिल वर्मा ने अभिनय किया।
समाजमें नया मैसेज : ज्वाराबोने के साथ ही ये कामना की जाती है कि सफेद ज्वारा ना उग जाए। हालांकि सफेद ज्वारा अशुभ नहीं है पर धार्मिक अनुष्ठान करवाना पड़ता है और इसी खर्चे के भय के कारण सफेद ज्वारा को खलनायक बना दिया गया है। नायिका के लाख मना करने पर भी ज्वारा में सफेद ज्वारा जाता है, लेकिन नायिका इन भ्रांतियों को दूर करते हुए किसी प्रकार का अनुष्ठान आदि नहीं करवाकर समाज में एक नई ऊर्जा का संचार करती है।