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5 गुना ज्यादा राशि देने पर भी कनेक्शन नहीं
ड्रिप(बूंद-बूंद)फव्वारा योजना में सामान्य श्रेणी से पांच गुना ज्यादा राशि जमा करवाने के बावजूद किसानों को खेती के लिए बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहे हैं। योजना से कनेक्शन देने पर जयपुर डिस्कॉम के इंजीनियरों ने अघोषित पाबंदी लगा दी है। योजना में 2000 से ज्यादा एग्रीकल्चर कनेक्शन पेंडिंग है, जबकि कई किसान डिमांड नोटिस की राशि जमा करवाने के साथ ही ट्यूबवेल सिस्टम पर 5 लाख रु. से ज्यादा खर्च कर चुके हंै।
बिजली कंपनी के एईएन एक्सईएन ने कॉर्पोरेट दफ्तर रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन (आरई) विंग की ओर से जारी मौखिक आदेशों का हवाला देकर ड्रिप योजना के बिजली कनेक्शन देने एस्टीमेट बनाने से आनाकानी कर रहे हैं। कई एईएन ने तो आवेदन लेना ही बंद कर दिया है। कनेक्शन नहीं मिलने से किसान कर्जे में डूबने लगे हैं। किसानों का कहना है कि यदि रबी की फसल से पहले बिजली कनेक्शन नहीं मिला तो कर्जा चुकाना दूभर हो जाएगा। जयपुर डिस्कॉम के इंजीनियरों का कहना है कि ड्रिप फव्वारा योजना से कनेक्शन देने की कीमत बढ़ाई जा रही है। ऐसे में इस योजना से आरई विंग ने कनेक्शन देने पर पाबंदी लगा रखी है। अब नई कृषि नीति जारी होने के बाद ही कनेक्शन जारी हो सकेंगे।
ऐसे मिलना था कनेक्शन
सरकारबिजली वितरण कंपनियों ने खेती में पानी की बचत करने सिस्टम का पूरा खर्चा वहन करने पर ड्रिप फव्वारा योजना लागू की थी। किसान को ट्रांसफार्मर, एचटी लाइन, सर्विस केबल सिस्टम का पूरा खर्चा देना होता है। साथ ही ड्रिप फव्वारा से सिंचाई का प्रमाण पत्र भी देना होता है। यह खर्चा 1 से 2.5 लाख रु. तक आता है, जबकि सामान्य श्रेणी से कनेक्शन पर 25 से 30 हजार रु. ही खर्च होते हैं। साथ ही ड्रिप योजना के कनेक्शनधारी को टैरिफ भी ढाई गुना बिल चुकाना पड़ता है।