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- पायलट ने कहा भाजपा सफाई तो देती रही, लेिकन िगनाने के िलए नहीं थी उपलब्धियां
पायलट ने कहा- भाजपा सफाई तो देती रही, लेिकन िगनाने के िलए नहीं थी उपलब्धियां
उपचुनावमें चार में से 3 सीटों पर जीत ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पायलट ने जो रणनीति बनाई, उस पर वे खरे उतरे। पेश है भास्कर से बातचीत-
जीतका सूत्र क्या रहा?
हमनेमाइक्रो लेवल पर रणनीति बनाई। वह कारगर साबित हुई। भाजपा सत्ता के मोह में थी। वह गफलत में थी कि मोदी की लहर अब भी बरकरार है और वह चारों सीटें जीतेगी।
टूटीहुई कांग्रेस को कैसे खड़ा कर पाए?
हमनेकेवल बड़े नेताओं, पदाधिकारियों को साथ जोड़ा, बल्कि सामान्य कार्यकर्ता को साथ लिया। उनको संगठित किया। उत्साह भरा। जिम्मेदारी दी और उसका अहसास भी कराया। कार्यकर्ताओं का यही जोश जीत में बदल गया।
चुनावजीतने की क्या रणनीति थी?
कांग्रेसके अग्रिम संगठनों यूथ कांग्रेस, सेवादल, एनएसयूआई और महिला कांग्रेस को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी। मतदाताओं तक पहुंच के लिए उनका एक्शन प्लान तैयार कराया। कैसे वे एक-एक वोट तक पहुंच सकें, इसकी भूमिका तय की।
क्याथा आपका माइक्रो मैनेजमेंट?
सूरजगढ़में यूथ कांग्रेस की टीम के साथ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष दीपेंद्रसिंह शेखावत सहित कई अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी गई। वहीं वैर में सेवादल के साथ विधायक घनश्याम मेहर, गिरिराज सिंह मलिंगा, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा आदि ने जिम्मा संभाला। मैंने खुद ने भी यहां 77 सभाएं कीं। नसीराबाद में एनएसयूआई के साथ विधायक धीरज गुर्जर, पूर्व विधायक महेंद्र गुर्जर समेत बड़ी संख्या में नेता लगे हुए थे। इन चारों सीटों पर मैं खुद नजर रखे हुए था। नसीराबाद में तो 65 सभाएं कीं। महिला कांग्रेस को कोटा दक्षिण की जिम्मेदारी दी गई। शांति धारीवाल, रघु शर्मा और माहिर आजाद समेत कई नेताओं की मेहनत से वोट का अंतर आधा कर िदया।
भाजपाकह रही है कि आपने चुनावों में सरकार पर बेवजह आरोप लगाए?
मुख्यमंत्रीवसुंधरा राजे ने नसीराबाद की सभा में भाषण दिया था। कहा था कि ये सीट उनकी नाक का सवाल है। वहां 38 विधायक, 4 मंत्री और 10 सांसदों सहित बड़ी संख्या में नेता पहुंचाए गए। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के खिलाफ वे मतदान वाले दिन शाम तक वहीं जमे रहे। उन्होंने जमकर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। इसके बावजूद कांग्रेस को जीत से दूर नहीं रख सके।
भाजपासे जनता का मोहभंग क्यों हुआ?
9माह में ही जनता भाजप