- Hindi News
- हसरत जयपुरी की पुण्यतिथि पर जीवंत हुआ उनका कृतित्व
हसरत जयपुरी की पुण्यतिथि पर जीवंत हुआ उनका कृतित्व
भारतीयफिल्म जगत को एक से बढ़कर एक गीतों की सौगात देने वाले जयपुर के मरहूम शायर हसरत जयपुरी की याद में पहली बार शहर में सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर उनके कद्रदानों ने पलक पावड़े बिछाकर इस अजीम शख्सियत के हुनर का इस्तकबाल किया।
जवाहर कला केंद्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम \\\"यादें हसरत जयपुरी\\\' में उर्दू अदब में उनके योगदान, गैर फिल्मी गीत गजल और फिल्मी सफरनामे पर आधारित कार्यक्रम पेश किए गए। समारोह में कला मर्मज्ञों द्वारा पत्र वाचन के अतिरिक्त ऑडियो-वीडियो डाॅक्यूमेंट्री के माध्यम से उन्हीं की जुबानी उनके स्वयं का परिचय, उनके जीवन के अनुभव एवं मुशायरों में प्रस्तुत कलाम गूंजे। इस पुरअसर प्रस्तुति से आज की शाम जयपुरवासियों के लिए यादगार बन गई।
सुर कल्चरल सोसायटी ने भी किया याद
उधर सुर कल्चरल सोसायटी की ओर से भी लियाकत अली और मुक्ता चड्ढा के संयोजन में हसरत जयपुरी’ पर अाधारित कार्यक्रम‘‘तुमसे अच्छा कौन है’’ आयोजित किया गया। इसमें ‘तुमसे अच्छा कौन है’, ‘कौन है जो सपनों में आया’, ‘जिंदगी इक सफर है सुहाना’, ‘बहारों फूल बरसाओ’, ‘छलके जो तेरी आखों से, ‘याद जाये बीते दिनों की’ जैसे गीतों को लियाकत अली, मुक्ता चड्ढा, नरेन्द्र वागले, रजनी सिंह, योगिता जांगिड़, राहुल आदि ने सुर दिए।
हसरत से देखिए हसरत की हवेली
गीतकारइकराम राजस्थानी ने ‘‘हसरत जयपुरी और उनके गैर फिल्मी गीत गजल’’ विषय पर पत्र वाचन करते हुए कहा, ‘उल्फत की, मुहब्बत की, ये चाहत की हवेली है। हसरत से इसे देखिए ये हसरत की हवेली है।’’ उन्होंने बताया कि जयपुर के घोड़ा निकास रोड से निकलकर हसरत ने इल्म और फन के घोड़े दौड़ाए। हसरत जयपुरी रूमानियत शायरी के शहंशाह थे। जिन लोगों ने इस शहर को गुलाबी बनाया, उनमें हसरत जयपुरी भी प्रमुख हैं।
जवाहर कला केंद्र के महानिदेशक उमराव सालोदिया ने ‘‘हसरत जयपुरी और उनका फिल्मी सफर नामा’’ विषय पर पत्र वाचन किया। सालोदिया ने हसरत जयपुरी के पुत्र अख्तर जयपुरी और आसिफ जयपुरी को केंद्र की ओर से सम्मानित भी किया।
पुत्रों ने सुनाए संस्मरण
कार्यक्रम की अगली कड़ी में हसरत जयपुरी के पुत्र अख्तर जयपुरी और आसिफ जयपुरी ने पारिवारिक संस्मरण सुनाए, जिसमें उनके मस्त मौला, यारों के यार वाले चरित्र से श्रोता वाकिफ हो सके। इसके बाद डॉ. मोहम्मद नईम खान ने ‘‘उर्दू अदब में हसरत जयप