सबमें जगे गो सेवा का भाव : राधाकृष्ण
गो सेवा के लिए हो रही नानी बाई को मायरो कथा
जयपुर। गोसेवा परिवार समिति की ओर से सांगानेर के चंदनवन में गो सेवा के लिए हो रही नानी बाई को मायरो कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ पर विराजमान राधाकृष्ण महाराज ने कहा कि व्यक्ति को गोमाता का आशीर्वाद मिल जाए तो उसका कल्याण निश्चित है। इसलिए हर व्यक्ति को मन में गोसेवा का भाव रखना चाहिए। जब तक गो सेवा का भाव नहीं होगा तब तक गो संरक्षण के प्रयास अधूरे रहेंगे।
उन्होंने कहा कि गाय संपूर्णता की प्रतीक है। धार्मिक, आर्थिक, वैज्ञानिक किसी भी दृष्टि से देख लिया जाए, गाय का अपना अलग महत्व है। इसके हर अंग ही नहीं रोम-रोम मेंं सात्विकता का वास है। गाय का दूध, गोबर, मूत्र, घी और दही में प्राण शक्ति हैं जो संसार के किसी भी पदार्थ में नहीं है। रोगी के लिए गाय एक वैद्य है तो धार्मिक व्यक्ति के लिए भगवान। धन की इच्छा रखने वाले के लिए यह खजाना है। उन्होंने कहा कि नरसी भक्त परम गोभक्त थे। उनके पास बहुत सारी गायें थीं। वे उनकी प्रेम से सेवा करते और जरूरतमंद को गाय और नंदी दान करते थे। इसी कारण स्वयं ठाकुरजी ने उनकी पुत्री का सांवरा सेठ बनकर मायरा भरा। जो भगवान के भरोसे पर रहते हैं, भगवान उनका विश्वास कभी तोड़ते नहीं है। उन्होंने मातृ शक्ति को जागरूक करते हुए कन्या भू्रण हत्या के खिलाफ संकल्पित करवाया। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. अरुण चतुर्वेदी, पूर्व राज्य सभा सांसद रामदास अग्रवाल उपस्थित थे। आयोजक दामोदर दास मोदी ने बताया कि रविवार को कथा का समापन होगा।