आलू की सप्लाई घटने से उत्पादन में कमी
महंगे आलू ने बिगाड़ा वेफर्स का जायका
पिछलेएक महीने के दौरान आलू के दाम लगभग दुगुने होने के चलते वेफर्स (आलू चिप्स) की कीमतें 20 से 25 फीसदी तक बढ़ गई हैं। महीनेभर पहले वेफर्स के लिए बतौर कच्चा माल उपयोग आने वाले आलू की कीमत बीस रुपए प्रति किलो थी, जो सप्लाई घटने से 40 रुपए तक पहुंच गई है। इस वजह से स्थानीय कंपनियों ने वेफर्स की खुदरा कीमतों को 120-130 से बढ़ाकर 170-180 रुपए प्रति किलो तक कर दिया है। इससे नवरात्र में उपवास करने वालों को वेफर्स के दाम ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं। राजस्थान में वेफर्स का बाजार सालाना करीब 125 करोड़ रुपए का है। इस बाजार में तीन नेशनल कंपनियों के ब्रांडों की हिस्सेदारी ज्यादा है। ये कंपनियां 10, 15 20 रुपए के पैक में वेफर्स की बिक्री करती है।
उद्यमियों के मुताबिक जयपुर में करीब 10-12 कंपनियां वेफर्स का उत्पादन करती हैं। लेकिन आलू की सप्लाई कम होने से इनमें से अभी दो-तीन कंपनियां ही उत्पादन जारी रखे हुए हैं। इन्होंने भी आलू की कीमतों में बढ़ोतरी के अनुरूप वेफर्स की कीमत को 45 फीसदी तक बढ़ा दिया है।
कान्हा का वेफर्स पैक भी महंगा
कान्हाब्रांड नाम से 200 ग्राम की पैकिंग में वेफर्स की बिक्री की जाती है। आलू महंगा होने से इस पैक की कीमत को 50 से बढ़ाकर 60 रुपए कर दिया गया है। -पुनीतजेठलिया, निदेशक,कान्हा स्वीट्स प्र.लि.
नमकीनविक्रेताओं ने भी बढ़ाए दाम
नमकीनका कारोबार करने वाले खुदरा विक्रेता भी वेफर्स बनाते और बेचते हैं। लूज में बिकने वाली वेफर्स की कीमत पहले 120 से 130 रुपए किलो तक थी, जिसको बढ़ाकर अब 170 से 180 रुपए किलो कर दिया गया है।
-जितेंद्रकुमार गुप्ता, संचालक,शंकर नमकीन
दीपावलीबाद आएगा नया आलू
पिछलेएक महीने के दौरान आलू की सप्लाई में कमी से आलू के दाम बढ़ गए। वेफर्स निर्माताओं को खास किस्म के आलू की जरूरत होती है। यह आलू दिल्ली से मंगाना पड़ रहा है। दीपावली से पहले आलू की कीमतों में कमी की संभावना कम है। -रामचंद्र,आलू-प्याजके थोक विक्रेता
स्थानीय कंपनियों ने रोका उत्पादन
वेफर्सबनाने के लिए पहाड़ी आलू का उपयोग होता है। राष्ट्रीय स्तर की कंपनियों के पास आलू का स्टॉक होता है, लेकिन छोटे ब्रांड थोक विक्रेताओं के पास स्टॉक करने की सुविधा नहीं होती। इसके चलते स्थानीय कंपनियों के लिए वेफर्स का उत्पादन जारी रखना मु