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हॉस्टल का कमरा नं. 52 बना टॉर्चर रूम

7 वर्ष पहले
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राजस्थानयूनिवर्सिटी केविवेकानंद हॉस्टल में रैगिंग के मामले में सामने आया है कि दोषी छात्रों ने कमरा नंबर 52 को टॉर्चर रूम बना रखा था। इस कमरे में ही छात्रों को देर रात्रि में शारीरिक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। इस बात की पुष्टि कुलपति द्व‌ारा गठित जांच कमेटी ने की है। जांच के दौरान पीड़ित दोषी छात्रों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। जांच समिति ने पीड़ित छात्रों की पहचान के आधार पर छात्रावास के कमरा न. 52 का भी निरीक्षण किया, जिसमें अक्सर देर रात्रि में पीड़ित छात्रों को शारीरिक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच समिति के सदस्यों ने उस रिकॉर्डेड टेलिफोनिक वार्ता को भी साक्ष्य के रूप मे लिया, जिसमे दो बाहरी छात्रों द्वारा विवेकानंद छात्रावास में रैगिंग किए जाने का उल्लेख किया गया था।

पहला मौका : यूनिवर्सिटीमें ये पहला मौका है जब रैगिंग प्रकरण में एकसाथ 10 छात्रों को कॉलेज हॉस्टल से निष्कासित किया गया है। पिछले सत्र में भी चार छात्रों को रैगिंग के आरोप में निलंबित किया था।

यूं चला घटनाक्रम

28अगस्त : कोछात्रों ने कुलपति को शिकायत।

29अगस्त : पुलिसमें मामला दर्ज हुआ

30अगस्त : जांचके ऑफिशयल आदेश जारी।

13सितंबर :जांच कमेटी ने अपना काम लगभग पूरा किया और 17 की सुबह रिपोर्ट सौंपी।

वार्डन की भूमिका पर संदेह

ये सवाल - अबसवाल उठता है कि वार्डन की मौजूदगी में कई बार रैगिंग हुई और वार्डन की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऐसे में वार्डन की भूमिका क्या रह गई।

20 दिन बाद हुई एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक

ये सवाल - सबकुछहोने के बाद एंटी रैगिंग कमेटी और यूनिवर्सिटी के सिस्टम की क्या भूमिका रह गई है। इस बैठक के क्या मायने रह गए।

तबीयत बिगड़ी : निष्कासनकी सूचना मिलने पर बीए प्रथम वर्ष के छात्र हंसराज की तबियत बिगड़ गई। छात्र का अारोप था कि चीफ वार्डन ने उसे धमकाकर बात की।

20 दिन : यूनिवर्सिटीने इस मामले को पिछले 20 दिन से लटका रखा था। पीड़ित छात्रों की िशकायत पर यूनिवर्सिटी को चेतावनी दी थी कि अगर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे कोर्ट में जाएंगे।

बीए अंितम वर्ष

सुरेशकुमार पिलानिया।

बीए द्वितीय वर्ष

मनफूलविश्नोई,

प्रवीण जाट, सुरेश कुमार।

बीए प्रथम वर्ष

अजयपालबिश्नोई, हंसराज, मनोज कुमार, साहिल, नरेश ज्यानी, संदीप