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पंजीयन बहाली के मामले में सरकार अब बैक फुट पर
राजस्थानहाउसिंग बोर्ड में निरस्त पंजीयनों के मामले में सरकार बैकफुट पर गई है। एक ओर कैबिनेट सब कमेटी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अंतिम छह माह के कार्यकाल के दौरान पुनर्जीवित किए गए हाउसिंग बोर्ड के 431 मकानों के आवंटन को गलत ठहरा निरस्त करने की सिफारिश की है। वहीं पिछली भाजपा सरकार के समय उन्हीं के हाउसिंग बोर्ड चेयरमैन अजयपाल सिंह ने करीब 800 निरस्त पंजीयनों को पुनर्जीवित किया था। अब उन मामलों को भी सीएम वसुंधरा राजे के समक्ष लाया गया है। सरकार ने अब उन पंजीयनों की भी तथ्यात्मक स्थिति मांगी है। सीएमओ के समक्ष जो स्थिति रखी गई है, उसके अनुसार गहलोत सरकार के समय कुल 517 निरस्त पंजीयन पुनर्जीवित किए गए।
2013 में लिए फैसले तकनीकी आधार पर सही थे, जबकि पूर्व भाजपा सरकार के समय बहाल किए निरस्त पंजीयन बिना बोर्ड की अप्रूवल के चेयरमैन स्तर पर ही बहाल किए गए। इससे सरकार बैकफुट पर है। यही कारण है कि 431 पुनर्जीवित पंजीयन निरस्त करने के फैसले के अभी मिनट्स तक जारी नहीं किए हैं और ही सरकार ने यूडीएच और हाउसिंग बोर्ड को इनके पंजीयन निरस्त करने के आदेश जारी करने को कहा है।
यूडीएच के अफसरों के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार परसराम मोर दिया की तरह अजयपाल सिंह के समय पुनर्जीवित किए पंजीयनों को भी निरस्त करेगी?
पंजीयनोंको लेकर कैबिनेट कमेटी ही दो फाड़
हाउसिंगबोर्ड के अध्यक्ष परसराम मोरदिया के समय फिर से बहाल किए पंजीयनों को निरस्त करने को लेकर कैबिनेट सब कमेटी खुद दो फाड़ है। कैबिनेट सब कमेटी की पिछली बैठक में जब पंजीयनों को फिर से निरस्त करने का फैसला किया गया, उसमें सदस्य चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ आए ही नहीं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी से भी जब पंजीयन निरस्त हुए आवेदकों ने संपर्क किया तो उनका कहना था कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है। यह फैसला केवल एक मंत्री ने किया।
ऐसे मामले तभी सामने आते हैं और उठते हैं जब कोई गलत काम होता है। मेरे कार्यकाल में मैंने कोई गलत काम नहीं किया। इसके सिवाय इस मामले में मुझे कुछ नहीं कहना है।
-अजयपालसिंह,
पूर्व अध्यक्ष, हाउसिंग बोर्ड
हमने सिर्फ गहलोत सरकार के पिछले छह माह के मामले रिव्यू किए हैं। इससे पहले भी कई अध्यक्षों के समय पंजीयन बहाल किए गए। उनमें कई गलत भी