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हाउसिंग प्रोजेक्ट क्लियरेंस में देरी से मकान 30 फीसदी तक महंगे हुए
हाउसिंगप्रोजेक्टक्लियरेंस में देरी से मकान 30 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। क्लियरेंस में देरी से मकान खरीदने वालों की जेब पर बोझ तो बढ़ा ही है, बिल्डर डेवलपर्स को भी वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह देखते हुए बिल्डर्स ने राज्य सरकार से हाउसिंग प्रोजेक्ट क्लियरेंस के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की मांग की है।
बिल्डरों के मुताबिक केंद्र राज्य सरकार के पांच विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और मंजूरी के बाद ही जयपुर विकास प्राधिकरण जैसी स्थानीय एजेंसियां नक्शों को पास कर मल्टी स्टोरी बिल्डिंगों के निर्माण की मंजूरी देती है। इस प्रक्रिया दो वर्ष तक का समय लग जाता है। इससे हाउसिंग प्रोजेक्ट की लागत 30 फीसदी तक बढ़ जाती है। इस बढ़ी लागत का बोझ खरीदार को ही उठाना होता है। वहीं जमीन खरीद में लगा पैसा लंबे समय तक फंसा रहने से बिल्डरों को वित्तीय परेशानी होती है।
^जेडीए और नगर निगम की बीपीसी की बैठक में दूसरे विभागों के अधिकारियों को नहीं बुलाया जा सकता है। बीपीसी की बैठक विभाग की आंतरिक बैठक होती है। शिखरअग्रवाल, जेडीसी
^केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक सबको मकान उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसको देखते हुए 90 दिन में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को क्लियरेंस दी जानी चाहिए। ऐसा करने से मकानों की कीमत में कमी संभव होगी। आत्मारामगुप्ता, चेयरमैन,एआरजी ग्रुप
^सिविक एजेंसियों की बीपीसी की बैठक में फायर की एनओसी और कन्सेंट टू एस्टेब्लिशमेंट का प्रावधान कर राज्य सरकार बिल्डर डेवलपर्स को राहत के साथ सस्ते मकानों का रास्ता खोल सकती है। क्रेडाई केंद्र सरकार के स्तर पर भी हाउसिंग प्रोजेक्ट को जल्दी क्लियरेंस के लिए प्रयास कर रही है। -गोपालगुप्ता, चेयरमैन,क्रेडाई राजस्थान
यह होगा असर
अमूमनआवासीय परियोजना को पूरा करने में 30 से 36 माह लगते हंै। ऐसे में सभी तरह की मंजूरी और एनओसी 3 माह में मिल जाए तो बिल्डर तय समय में प्रोजेक्ट पूरा कर बुकिंग कराने वाले ग्राहकों को तय समय में फ्लैट का पजेशन दे सकते हैं। इससे बिल्डरों की वित्तीय समस्याओं का समाधान होगा और लोगों को सस्ते मकान मिल सकेंगे। मुंबई जैसे शहरों में ऐसी ही व्यवस्था है।
इन विभागों से मंजूरी लेना जरूरी है
20हजार वर्ग मीटर से बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण विभाग से एनओसी की जरूरत होती है। एयरप