चौबेजी बनने चले छब्बेजी

9 वर्ष पहले
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जयपुर।


भारंगम की छठी शाम में नाट्य प्रेमी जवाहर कला केंद्र में फिल्म और टेलीविजन अभिनेता राकेश बेदी की अभिनय प्रतिभा से रूबरू हुए। इस मौके पर बेदी ने विजय तेंदुलकर लिखित 'मसाजÓ के जरिए मुंबई आकर भविष्य के सपने सजाने वाले एक कलाकार के जीवन संघर्ष की दास्तां को जीवंत किया। इस नाटक को उन्होंने किस्सागोई शैली में अकेले ही मंचित किया। हैप्पी कुमार अभिनेता बनने के लिए मुंबई आता है, पर एक सी ग्रेड डायरेक्टर का चौथा सहायक निर्देशक बनकर रह जाता है। इस कशमकश में उसकी हालत उस चौबेजी की तरह हो जाती है, जो बनने तो चले थे छब्बेजी पर रह गए दुबेजी। अपने इस संघर्ष के दौरान उसकी मुलाकात कई दिलचस्प किरदारों से होती है। इनमें एक धूर्त व्यक्ति, सिद्धांत विहीन नेता और उसके मसखरे निजी सचिव खास थे। राकेश बेदी ने सभी किरदारों को बेहतरीन अंदाज में जिया और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।


शब्दों का बेहतरीन मसाज


नाटक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए थिएटर इन एजुकेशन एक्सपर्ट रंगकर्मी प्रियदर्शिनी मिश्रा ने इस नाटक को शब्दों के जरिए दर्शकों के दिमाग की मसाज की संज्ञा दी। प्रियदर्शिनी ने बताया कि अभी तक किस्सागोई शैली में वो मैकेनिकल अभिनय शैली से ही रूबरू होती आई हैं, जिसमें कलाकार जबर्दस्ती अभिनय करने की कोशिश करता है। लेकिन इस नाटक में राकेश बेदी ने पहली बार इस शैली की मोनोटोनी को तोड़ते हुए सहज अभिनय शैली की बानगी पेश की। उन्होंने डायलॉग के जरिए उन बिंबों को जीवंत किया, जिन्हें व्यक्ति अपने आसपास के परिवेश में देखता और महसूस करता है।