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जांच रिपोर्ट: नकली घी सरगना से घूस लेकर अफसरों के ट्रांसफर करते थे एडीजी

7 वर्ष पहले
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(फोटो- जसवंत संपतराम।)
भास्कर के विशेष संवाददाता श्रवण सिंह राठौड़ छह महीने से नकली घी से जुड़े हाई प्रोफाइल केस की पड़ताल कर रहे थे। समय पर चालान पेश नहीं होने और जांच अफसर के तबादले ने एसीबी जांच पर सवाल खड़े किए। पड़ताल के दौरान ही एसीबी की एक हजार पेज की जांच रिपोर्ट मिली। इसमें राजस्थान पुलिस के कई बड़े चेहरे बेनकाब होते नजर आ रहे हैं। भास्कर के पास सारे सबूत एवं तथ्य मौजूद हैं।
जयपुर. एक साल पहले 7 दिसंबर को नकली घी के मामले में 6 पुलिसकर्मी, 10 फूड इंस्पेक्टर, 4 एसीबीकर्मियों सहित 102 लोगों के खिलाफ दर्ज मामले में अधिकतर आरोपी जमानत पर हैं और मामले की तह में जाने पर नए खुलासे करने वाली जांच रिपोर्ट एसीबी के ताले में कैद है। कारण- राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक जसवंत संपतराम। नकली घी सरगना दिनेश सिंघल से उनकी साठगांठ के पुख्ता सबूत के रिपोर्ट में दावे किए गए हैं।
कॉल डिटेल, बैंक स्टेटमेंट, गवाह के आधार पर बताया गया है कि नकली घी सरगना दिनेश सिंघल के जरिए रिश्वत लेकर एडीजी पुलिस अफसरों और कर्मचारियों के तबादले करते थे। वहीं, सिंघल पुलिस वालों को संपतराम से संबंध का हवाला देकर डिप्टी स्तर तक के अफसरों से स्थानांतरण के नाम पर पैसे वसूलता था। फिर ये पैसे एडीजी तक पहुंचते थे। 8 पुलिसकर्मियों से पैसे लेकर स्थानांतरण होना प्रमाणित माना।

एसीबी के डीजी की विशेष शाखा के प्रभारी जांच अधिकारी एएसपी ने 60 दिन से पहले ही अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर दी थी, लेकिन वरिष्ठ अफसरों ने 90 दिन की अवधि में चालान पेश नहीं होने दिया। इस कारण जेल में बंद दोनों आरोपियों को जमानत मिल गई। हालांकि वे दूसरे केस में अभी जेल में ही हैं। जांच अफसर की ओर से पेश की गई एक हजार पेज की 531 नंबर मुकदमे की यह जांच रिपोर्ट अब ताले में है। जांच दूसरे अफसर को दे दी गई है।
इसमें एडीजी जसवंत संपतराम के खिलाफ पद का दुरुपयोग करके 8 पुलिस वालों के सिंघल के कहने पर स्थानांतरण करने , नकली घी के कारोबारी को अवैध फायदा पहुंचाने और बदले में रिश्वत, उपहार आदि प्राप्त करने का उन पर जुर्म प्रमाणित माना है।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक जसवंत सपतराम की पत्नी कमलजीत सपतराम एक इश्योरेंस कंपनी में एजेंट हैं। काम के कमीशन के बदले जसवंत सम्पतराम सिंघल और उनसे काम करवाने वाले पुलिस वालों से पॉलिसियां करवाने की शर्त रखते थे। सिंघल ने एडीजी की पत्नी से बीमा की कई सारी पॉलिसियां ले रखी थी, जिसका वो एक साल में 2 लाख रुपए का प्रीमियम चुकाता था।
इसके अलावा वह अन्य पुलिसवालों और अपने साथियों पर भी कमलजीत से बीमा कराने के लिए दबाव डालता था। जांच में सामने आया कि सिंघल एडीजी से रसूखातों और पुलिस वालों को वांछित जगह पोस्टिंग दिलवाकर के अपने नकली घी का कारोबार सहूलियत से चलाता था।
एसीबी में कैद एक जांच रिपोर्ट का सच

> 60 दिन में जांच पूरी, फिर भी 90 दिन में चालान पेश नहीं करने दिया, आरोपियों को मिली जमानत
> 8 पुलिसकर्मियों से पैसे लेकर स्थानांतरण होना प्रमाणित माना
> एसीबी से जांच अधिकारी का ट्रांसफर, जांच अब नए अधिकारी को सौंपी
> जांच अधिकारी बदलने के साथ ही हाई प्रोफाइल प्रकरण की फाइल ठंडे बस्ते में।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्य
> एडीजी से नकली घी सरगना की 464 बार बातचीत।
> सरगना से पूछकर ही निवेश करते थे एडीजी।
> तबादलों का दलाल था सरगना।
> दोनों की बातचीत की ट्रांसस्क्रिप्ट।
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