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कुएं में न कूदें, खूब पढ़ें, सदन की गरिमा रखें : मेघवाल

8 वर्ष पहले
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जयपुर। सदन ने बुधवार को सर्वसम्मति से कैलाश मेघवाल को विधानसभा अध्यक्ष चुन लिया। पद संभालते ही मेघवाल ने स्पष्ट किया कि वे अब किसी एक पार्टी के सदस्य नहीं सदन के अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे। इसलिए न तो विपक्ष कम संख्या होने पर चिंतित हो और न ही पक्ष अपनी ज्यादा संख्या का फायदा उठाने की कोशिश करे।

ऐसे में चाहे पक्ष या विपक्ष का कोई भी विधायक हो, वे विधायी कार्यवाही का पूरा सम्मान करेंगे। प्रदेश नई करवट लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वे कई तरह की अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आशान्वित है। यह सदन इन अपेक्षाओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति का साधन बने, यही लक्ष्य हो।

अध्यक्ष की व्यवस्था पर कहा
ब्रिटेन में कहा जाता है- द स्पीकर इज वन हू स्पीक्स मिनिमम। यानी यदि सदस्य विचार रखते समय सदन संचालन की प्रक्रिया, नियम, उपनियम, परंपरा और दिशा-निर्देशों का ठीक से पालन करते हैं, तो आसन की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाता। अवहेलना होने अथवा पालना नहीं होने की स्थिति में ही स्पीकर हस्तक्षेप को बाध्य होता है।

3 हिदायतें

1. कुएं में कूदने की प्रवृत्ति त्यागें। (वैल में आने की प्रवृत्ति) बीच-बीच में अपनी बात लेकर कूदने और वॉकआउट की आदत से बात का महत्व कम होता है।

2. प्रश्नकाल का महत्व समझें। उसे स्थगित कराने की प्रवृत्ति त्यागें। वैसे विपक्ष की जितनी संख्या है, उससे स्थगित होने की संभावना कम ही है।

3. लोकतांत्रिक व्यवस्था का वातावरण बनाएं। व्यवस्था तोडऩे की प्रवृत्ति गरिमा के खिलाफ है।


...और यह सीख भी
अध्ययन की आदत डालें। विधानसभा के नियम-उपनियम व कार्यवाही संबंधी जो साहित्य दिया गया है, उसे बार-बार पढ़ें। कार्यवाही के संबंध में सभी प्रकार की जानकारी का अध्ययन करें। विधानसभा के पुस्तकालय का फायदा उठाएं। पढऩे से ज्ञान बढ़ेगा, कार्यवाही संचालन में सहयोग मिलेगा।

सदन में आपके मुद्दे, बहस के विषय वो हों जो राज्य के सभी क्षेत्रों की चुनौतियों का समाधान करें।


विपक्ष को दिया भरोसा, चिंता न करें
सर्वसम्मति से निर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि कम संख्या पर विपक्ष चिंतित नहीं हो। किसी भी विधायक, पक्ष को शिकायत नहीं रहेगी। सभी के लिए बराबर सहयोग रखूंगा। विपक्ष को पक्ष की संख्या के दबाव में आने की जरूरत नहीं। सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना जाना मेरे राजनीतिक सफर की विशिष्ट उपलब्धि है। भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहा हूं। इससे सबके लिए एकभाव से काम कर सकूंगा।