जयपुर. तबादलों पर लगा बैन सरकार ने भले ही हटा लिया हो, लेकिन 10 जिलों में 12 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो इसका फायदा नहीं ले पाएंगे। वजह-तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों में अपनाई जा रही दोहरी नीति। राज्य के 23 जिलों में तबादलों के नियम अलग हैं बाकी 10 में अलग। ये दस जिले प्रतिबंधित हैं यानी एक बार नौकरी लगने के बाद शिक्षक यहां से दूसरे जिले में नहीं जा सकते। यहां नौकरी कर रहे शिक्षक राज्य में कहीं भी जाने को तैयार हैं, लेकिन पिछले 16 साल से यहां तबादलों पर रोक है। पीड़ित शिक्षकों में 5 हजार से ज्यादा तो महिला टीचर हैं। आखिरी बार 1998 में यहां तबादले किए गए थे।
तर्क सरकार का
ये जिले शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं। अगर तबादलों पर लगा बैन हट जाएगा तो ये शिक्षक अपने गृह जिले में चले जाएंगे और यहां शिक्षकों की कमी हो जाएगी।
पीड़ा शिक्षकों की
> शिक्षक खासकर महिला टीचर्स लंबे समय से परिवार से दूर हैं। नौकरी ही बूढ़े मां-बाप की सेवा में आड़े आ रही है। परिवार को नहीं संभाल पा रहे हैं।
> सरकार आश्वासन तो देती है। लेकिन पिछले 16 साल से कोई राहत नहीं मिली है।
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