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PICS: छावनी बना बगराना, किसानों से निपटने के लिए जंग-सी तैयारी

7 वर्ष पहले
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(हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन, जेडीए और पुलिस ने अवाप्तशुदा जमीन को कब्जे में लेने की पूरी तैयारी की। बगराना में पूरे लाव-लश्कर के साथ पहुंच गया पुलिस-प्रशासन।)
जयपुर. रिंग रोड के लिए अवाप्त जमीनों का कब्जा लेने की कार्रवाई गुरुवार सुबह 7 बजे खोरी रोपाड़ा से शुरू हो जाएगी। जेडीए ने 47 किलोमीटर की रिंग रोड के लिए 40 दिन के अभियान की रूपरेखा तैयार की है। जिला प्रशासन, जेडीए और पुलिस की ओर से की गई तैयारियों से जाहिर है कि वो हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। कानोता, खो-नागोरियान, शिवदासपुरा और बस्सी इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। गुरुवार को बगराना पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
यह है योजना: आगरा रोड (एनएच 11) से अजमेर रोड (एनएच 8) वाया टोंक रोड (एनएच-12) तक करीब 47 किलोमीटर लंबाई में रिंग रोड बनाई जाएगी। इसके तहत 90 मीटर चौड़ाई में मुख्य कॉरिडोर और दोनों ओर 135 मीटर चौड़ाई में कॉरिडोर विकसित होंगे।
बगराना छावनी बना
बुधवार शाम को बगराना में डेढ़ हजार पुलिसकर्मियों के साथ पूरा लाव-लश्कर तैनात कर दिया गया। 16 आरपीएस अफसर, 25 पुलिस निरीक्षक, सात जिलों से आए करीब 1100 कांस्टेबल, चतुर्थ एवं पांचवीं बटालियन आरएसी, हाड़ी रानी महिला बटालियन की दो कंपनियां, एसटीएफ की दो कंपनियां लगाई गई है। 12 जेसीबी, दो ग्रेडर, 6 ट्रैक्टर ट्रॉली, 4 डम्पर, 50 श्रमिक मौके पर हैं। कानोता थाने से 10 मिनी बसें, 8 बोलेरो और जीप ली गई हैं। गोविन्दपुरा, रोपाड़ा, खोरी रोपाड़ा, लखेसरा, बूड़थल, कानड़वास, भटेसरी, हिंगोनिया, सुमेल, बगराना, गोविन्दपुरा उर्फ रोपाड़ा, गांव खोरी में कब्जे की कार्रवाई होगी। पुलिस कमिश्नर जंगा श्रीनिवास राव ने मौका निरीक्षण किया तथा स्थानीय जनों से कार्यवाही में सहयोग की अपील की।
किसान प्रार्थियों ने कोर्ट में कहा था- रिंग रोड के लिए 90 मीटर की चौड़ाई प्रस्तावित है, सरकार 360 मीटर जमीन अवाप्त कर रही है, जो गलत है। सरकार रिंग रोड की प्रस्तावित चौड़ाई के बाद शेष बची जमीन को अन्य उपयोग के लिए बेचेगी। भूमि अवाप्ति अधिनियम के प्रावधानों के तहत अवार्ड जारी होने के पांच साल बाद तक कोई कार्रवाई नहीं हो तो वह अवैध हो जाती है। ऐसे में रिंग रोड के लिए प्रस्तावित जमीन ही अवाप्त की जाए।
हाईकोर्ट न्यायाधीश बेला एम.त्रिवेदी ने वीरेन्द्र सिंह व अन्य की याचिका में जेडीए कार्रवाई पर रोक लगाने वाले प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को इस मामले में यह कहते हुए लागू नहीं माना कि यहां 95 प्रतिशत किसानों ने जमीन समर्पित कर कब्जा दे दिया है। सरकार की ओर से कहा कि शहर में भारी वाहनों का दबाव रहता है। बाईपास बनाना है और यह जनहित का मामला है। कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई जाए।
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