जयपुर. त्रिपोलिया बाजार में मेट्रो प्रशासन की लापरवाही के कारण हुआ हादसा मेट्रो अधिकारियों के लिए गले की फांस बन गई है। हादसा के बाद प्रशासन ने दो दुकानों के सामने धंसे बरामदों की छत आनन-फानन में हटा दी, लेकिन अब इन बरामदों के मूल स्वरूप में पुनर्निर्माण में दो साल लग जाएंगे, क्योंकि मेट्रो प्रशासन पहले बरामदों की अस्थाई छत डालकर रास्ता खोलने में लगा हुआ है। इसके बाद मेट्रो का काम पूरा होने के बाद मूल स्वरूप में निर्माण करने का प्रस्ताव है।
टूटे बरामदों की जगह पहले रास्ता खोला जाएगा, ताकि लोगों और व्यापारियों को परेशानी नहीं हो। इसके बाद बरामदों की डिजाइन तैयार करके ऐसे कारीगरों की तलाश की जा रही है जो इन्हें मूल स्वरूप में लौटा सकें। इसमें समय तो लगेगा ही। -रवि माथुर, मैनेजर सिविल
मेट्रो को कारीगरों की तलाश
मेट्रो प्रशासन को पुराने कारीगरों की तलाश है, जो भवन, इमारत, बरामदों को मूल स्वरूप में ला सकें। हालांकि बरामदों को मूल स्वरूप में बनाने के लिए मेट्रो प्रशासन ने नगर निगम ठेकेदारों से संपर्क किया है, लेकिन कुशल कारीगर नहीं होने पर नगर निगम ने मना कर दिया है।
व्यापारियों ने बताई समस्या
टूटे गए बरामदों से लोगों और व्यापारियों को हो रही समस्या को लेकर सोमवार को मेट्रो अधिकारी और त्रिपोलिया व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार गुप्ता ने दौरा किया। व्यापारियों ने मेट्रो अधिकारियों को सेफ्टी के इंतजाम करने के बाद काम शुरू करने की बात कहीं। व्यापारियों के मुताबिक- मेट्रो की खुदाई से त्रिपोलिया बाजार में दो दुकानें के आगे बरामदा धंसने के साथ आसपास की 15 से ज्यादा दुकानों के बाहर दरारें आ गई हैं। रिपेयर होने पर दुर्घटना होने की संभावना ही है।