(12:24 बजे सूर्य सूर्य की सीधी किरण षष्टांश यंत्र पर पड़ी। ये विषुवत रेखा से दूरी बताती है। मंगलवार को सूर्य दिनभर विषुवत रेखा पर ही रहा।)
जयपुर. सूर्य के दिशा परिवर्तन की अद्भुत खगोलीय घटना को मंगलवार को जंतर-मंतर में साक्षात देखा गया। सायन सूर्य तुला राशि में था। दिन-रात की अवधि बराबर रहने वाली इस खगोलीय घटना यानी शरद संपात और विषुवत दिन में सूर्य ने उत्तर से दक्षिण गोल में जाना शुरू किया। मंगलवार को सुबह 6 बजकर 17 मिनट पर सूर्योदय हुआ। मध्याह्न 12:24 बजे सूर्य का उत्तर से दक्षिण गोल में आना आरंभ हुआ।
मध्याह्न 1:35 बजे सूर्य दक्षिण गोल में प्र्वेश कर गया। अब दिन की अवधि घटेगी और रातों की अवधि बढ़ती जाएगी। फिर 22 दिसंबर को सूर्य उत्तरायण होगा, यानी सबसे छोटा दिन होगा। इसके बाद दिन की अवधि पुन: बढ़ने लगेगी। जंतर-मंतर की अधीक्षक सरोजनी चंचलानी के मुताबिक- वेधशाला के षष्टांश यंत्र व जयप्रकाश यंत्र पर सूर्य के दिशा परिवर्तन का नजारा स्पष्ट नजर आया। सूर्य पूरे दिन विषुवत रेखा पर रहा।
यूं समझें सूरज की दिशा
सूर्य के दिशा परिवर्तन की खगोलीय घटना वर्ष में दो बार होती है। इन दोनों ही तिथियों को दिन-रात बराबर रहते हैं। 21 मार्च और 23 सितंबर ऐसी तिथियां हैं। 21 जून को दक्षिणी ध्रुव सूर्य से सर्वाधिक दूर रहता है, इसलिए इस तिथि को दिन सबसे बड़ा होता है। इसके बाद 22 दिसंबर को सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। इसलिए 22 दिसंबर को दिन की अवधि सबसे कम और रात सबसे लंबी होती है। खगोलविदों के मुताबिक 22 दिसंबर के बाद दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य दक्षिण की ओर बढ़ता है तो दक्षिण गोल सूर्य कहलाता है। सूर्य उत्तर की ओर जाता है तो उत्तर गोल सूर्य कहलाता है। दोनों स्थितियों की अवधि 6 माह होती है।
12 राशियों से गुजरता हैं दिन-रात: ज्योतिषीय ज्ञान में पूरे दिन में 12 राशियां कवर होती हैं। ज्योतिषाचार्य विनोद शास्त्री के मुताबिक- इनमें छह राशियां दिन में और छह राशियां रात में बदलती हैं। हर डेढ़ से सवा दो घंटे में लग्न राशि में भी परिवर्तन होता है।
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