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चुनाव पूर्व सीएम प्रोजेक्ट किया तो नहीं करेंगे काम

9 वर्ष पहले
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जयपुर। राजस्‍थान की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आ गया है। प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री और भाजपा नेता वसुंधरा राजे सिंधिया के खिलाफ उन्‍हीं की पार्टी के गुट ने बागी तेवर अपना लिए हैं।
चुनाव पूर्व भाजपा का सीएम प्रोजेक्ट करने के संभावित फैसले के खिलाफ वसुंधरा विरोधी खेमे ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश प्रभारी कप्तान सिंह सोलंकी से रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय में कटारिया, रामदास अग्रवाल, ललित किशोर चतुर्वेदी, घनश्याम तिवाड़ी समेत 20 से अधिक संघनिष्ठ नेताओं ने मुलाकात की। इन नेताओं ने साफ कहा कि अगर दिल्ली से उनकी मर्जी के खिलाफ प्रदेशाध्यक्ष थोपा गया तो वे चुनावों में काम नहीं करेंगे।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए रामदास अग्रवाल का नाम सुझाया गया है। कटारिया ने बैठक से बाहर आकर कहा कि पार्टी का जो मूल चेहरा, संस्कार और मूल्य हैं, उससे इधर-उधर हुए तो हम भी इस व्यवस्था से बंधे रहने को बाध्य नहीं हैं।
प्रदेश कार्यालय के बंद कमरे में सोलंकी के साथ दो घंटे चली बैठक में संघ खेमे के इन भाजपा नेताओं ने तीन मांगें रखीं। जिसमें पार्टी की मूल विचारधारा से जुड़े नेता को ही सबकी राय लेकर प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। अध्यक्ष और सीएम पद के लिए एक ही व्यक्ति को तय नहीं किया जाए। चुनाव पूर्व पार्टी किसी को सीएम प्रोजेक्ट नहीं करे।
भाजपा प्रभारी कप्तान सिंह सोलंकी ने इनसे कहा कि वे उनकी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा देंगे। शाम को सोलंकी दिल्ली रवाना हो गए। उल्लेखनीय है कि पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा ने वसुंधरा राजे को कमान सौंपने की वकालत करते हुए गुलाबचंद कटारिया समेत कई नेताओं पर आरोप भी लगाए थे।
गडकरी की नहीं मानी, आगे की क्या गारंटी
वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने वसुंधराराजे को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर हरियाणा का प्रभारी बनाया तो वे एक भी दिन वहां नहीं गईं। कटारिया की यात्रा के मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्णय के खिलाफ जाकर वसुंधरा राजे ने विरोध किया। नेताओं का कहना था कि वसुंधरा राजे ने पार्टी से इस्तीफे की धमकी दी। उनमें तो पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता ही नहीं है। फिर भी उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ाने की बात हो रही है। आगे उनकी क्या गारंटी रहेगी।
बाहरी नेताओं पर अंकुश लगे
सोलंकी से इन नेताओं ने कहा कि राजेंद्र राठौड़, रोहिताश्व कुमार और राधेश्याम गंगानगर जैसे बाहर से आए हुए नेताओं ने पार्टी और वसुंधरा राजे को कैप्चर कर रखा है। इससे पार्टी की विचारधारा को नुकसान हो रहा है।
इन्होंने भी मिलाया सुर में सुर
सतीश पूनियां, महावीर प्रसाद जैन, वासुदेव देवनानी, देवीशंकर भूतड़ा, रमेश मीणा, मदन दिलावर, राजेंद्र कुमार गहलोत, प्रसन्नजीत मेहता, ऋषि बंसल, हरिराम रिणवा, महावीर प्रसाद जैन, फूलचंद भिंडा, ओम सारस्वत, बजरंगलाल जाट।
इन्होंने कहा, वसुंधरा को सौंपी जाए कमान
कप्तान सिंह सोलंकी से रविवार सवेरे भाजपा विधायक कालीचरण सर्राफ, अशोक परनामी और राजपाल सिंह शेखावत ने मिलकर वसुंधरा राजे को कमान सौंपने की मांग की। तीनों नेता प्रदेश प्रभारी के साथ बंद कमरे में करीब एक घंटे तक रहे।
व्यक्ति का स्थान नहीं, विचार बड़ा : चतुर्वेदी
पार्टी में व्यक्तिप्रमुख नहीं होना चाहिए। पहले राष्ट्र, फिर पार्टी और अंत में व्यक्ति का स्थान। हम विचारों से बंधे है। प्रभारी को बता दिया है कि विचारों से ही बीजेपी-बीजेपी है। भाजपा का ध्येय तो समाज का निर्माण करना है। सत्ता लक्ष्य नहीं है। जब व्यक्ति बहुत बड़ा हो जाए तो वो सोच ठीक नहीं है।
ललित किशोर चतुर्वेदी, पूर्व अध्यक्ष, भाजपा
पार्टी में गुटबाजी दूर करेंगे : सोलंकी
जो भी नेता आए थे, उनकी बात सुनी। चुनावी साल में ऐसी बातें सामान्य हैं। गुटबाजी दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अपने कर्तव्य को बेहतर तरीके से निभाऊंगा। पार्टी अध्यक्ष और सीएम का निर्णय दिल्ली को करना है।
कप्तानसिंह सोलंकी, प्रदेश प्रभारी, भाजपा
भाजपा को भाजपा ही रहने दो : कटारिया
भाजपा को भाजपा ही रहने दो। यदि इसे किसी की शक्ल में ढाला जाता है, तो हम भी उस व्यवस्था से बंधे रहने के लिए बाध्य नहीं हैं। राजस्थान जिसे बीजेपी मानता और पहचानता है, वही फेस बीजेपी का रहेगा। जिन संस्कारों में पला-बढ़ा हूं, जिस भाजपा की हमने शुरू से कल्पना कर रखी है, उससे भटकाव आने पर मन विचलित होता है।
गुलाबचंद कटारिया,
पूर्व अध्यक्ष, भाजपा
बाहरी नेताओं ने वसुंधरा को घेर रखा है : अग्रवाल
पार्टी में बाहर से आए हुए कुछ नेताओं ने वसुंधराराजे को घेर रखा है। हमें वसुंधरा राजे से दिक्कत नहीं है, लेकिन उनको घेरने वाले बाहरी नेता पार्टी को हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष और नेतृत्व करने वाला, दोनों अलग-अलग व्यक्ति हों।
रामदास अग्रवाल,
पूर्व अध्यक्ष, भाजपा
अब राजा- महाराजाओं का जमाना नहीं रहा : महावीर जैन
अब राजा-महाराजाओं का जमाना नहीं है। यह प्रजातंत्र है। पार्टी को ठीक करेंगे, इसके लिए जरूरत पड़ने पर मिट जाएंगे। जनता का राज है। चुनाव से पहले सीएम घोषित करने की परिपाटी ही गलत है। आलाकमान क्या होता है, हम ही आलाकमान है।
महावीर प्रसाद जैन,
पूर्व चीफ व्हिप, भाजपा