जयपुर. जिला प्रशासन ने पब्लिक डिमांड रिकवरी (पीडीआर) एक्ट- 1952 में प्रोत्साहन राशि को लेकर जेडीए का साथ चल रहे विवाद का पटाक्षेप करते हुए बकायादारों पर कार्रवाई शुरु कर दी है। जेडीए ने जिला प्रशासन को वसूली पर प्रोत्साहन राशि देने से साफ मना कर दिया है, वहीं जिला प्रशासन ने भी प्रोत्साहन राशि पर किसी तरह का विवाद होने से इंकार कर दिया है। इस बीच कलेक्टर ने जेडीए की लीज राशि, ऑडिट पैरा सहित अन्य मामलों की बकाया राशि जमा नहीं करवाने वाले 18 बकायादारों को पीडीआर एक्ट की धारा- 6 में वसूली के नोटिस थमा दिए हैं।
इन बकायादारों पर जेडीए के करीब 21 करोड़ रुपए बकाया है। वहीं जेडीए मुताबिक कुल मामलों में करीब 35 से 40 करोड़ की बकाया राशि वसूलना है। जिला प्रशासन ने इन बकायादारों को नोटिस का जवाब देने व बकाया राशि जमा कराने के लिए 30 दिन का समय दिया है। तय समय में जवाब व बकाया राशि जमा नहीं कराने पर जेडीए की ओर से भेजी गई संपत्ति की सूची में से इनकी अचल संपत्ति पर कुर्की की कार्यवाही होगी। इसके बाद बकाया राशि की पूर्ण वसूली के लिए उनकी संपत्ति नीलाम की जाएगी। इसी बीच जेडीए ने राज्य सरकार को एक बार फिर बकाया वसूली के अधिकार उनके जोन कमिश्नरों को देने की मांग की है।
एक बकायादार ने नोटिस मिलते ही भेज दिया चैक
जेडीए के जोन- 6 में आगरा की फर्म आर.एन. अग्रवाल ने काम किया था। ऑडिट में इस फर्म पर एक लाख 96 हजार रुपए की राशि बकाया निकाली गई। जिला प्रशासन ने पीडीआर एक्ट में संपत्ति कुर्क करने का नोटिस थमाया। इसके बाद फर्म ने जिला प्रशासन को एक लाख 96 हजार रुपए का चैक भिजवा दिया।
कलेक्टर ने 14 मामले सुधार के लिए जेडीए को भेजे
जेडीए ने 2008 से अब तक लीज, ऑडिट पैरा सहित अन्य मामलों में बकायादारों से पीडीआर एक्ट में वसूली के लिए जेडीए को 32 मामले भेजे हैं। इनमें से 14 मामलों में जेडीए ने जिला प्रशासन को अधूरी जानकारी भेज दी। कई मामलों में जेडीए ने बकायादारों की लीज डीड की कॉपी नहीं भेजी। इसके कारण जिला प्रशासन इन बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई शुरु नहीं कर पा रहा है। कई बकायादारों ने अपना ठिकाना ही बदल दिया, ऐसे में उनके नोटिस तामील नहीं हो पा रहे हैं। कुछ मामलों में लीज डीड व बकाया राशि में अंतर आ रहा है। ऐसे में कानूनी कार्यवाही में अड़चन आ रही है।