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बेटियां गोद लेने के लिए 28 दंपती सालभर से प्रतीक्षा में, शिशु गृह में मात्र 3 बच्चियां

7 वर्ष पहले
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जयपुर. जयपुर में बेटियां गोद लेने का चलन बढ़ा है। इनमें ज्यादातर वे दंपती हैं, जिनके पहला बेटा है और बेटी के बिना उन्हें फैमिली अधूरी लग रही है। इस अधूरेपन को भरने के लिए वे शिशु गृह आ रहे हैं, लेकिन उन्हें बेटी ही नहीं मिल पा रही। सालभर से करीब 28 दंपति प्रतीक्षा सूची में
हैं, जबकि वर्तमान में शिशु गृह में तीन बच्चियां हैं।
शिशु और बालिका गृह की अधीक्षक किरण पंवार ने बताया कि तीन साल पहले शिशु गृह में बेटों के लिए आवेदन ज्यादा आते थे। गोद देने के लिए बेटा नहीं होने पर बेटी लेने की सलाह दी जाती थी, लेकिन दंपती बेटी को अपनाने में रुचि नहीं दिखाते थे। हालांकि पिछले एक साल में जयपुर सहित दिल्ली, मुंबई से करीब चार ऐसे दंपतियों ने अावेदन किया है, जिनके बेटे हैं। ये बिजनेस परिवार से हैं, लेकिन बेटी के बिना उन्हें घर सूना सा लगता है। उन्हें 2-3 साल की बेटी चाहिए। लोगों में जागरूकता बढ़ने से बेटियों के प्रति मोह बढ़ा है। साधारण दंपतियों की ओर से भी बेटा-बेटियों के लिए बराबर के आवेदन आ रहे हैं।
क्यों बढ़ रही है प्रतीक्षा सूची
शिशु गृह में हर साल 12 से 13 बच्चे आते हैं। किसी भी बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया में डेढ़ से दो महीने का समय लगता है। मांग के अनुरूप बच्चे कम आने से प्रतीक्षा सूची बढ़ रही है। अभी तक 80 दंपतियों के अावेदन आ चुके हैं।