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जहां क्रूड ऑयल नहीं वहां रिफाइनरी, फिर हमारे यहां क्यों नहीं?

9 वर्ष पहले
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जयपुर.  बाड़मेर-सांचौर बेसिन में पेट्रोलियम के 7.3 मिलियन टन के भंडार होने के बावजूद रिफाइनरी के लिए लंबी मशक्कत करनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को केंद्र में कांग्रेसनीत सरकार होने के बावजूद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी तक से सिफारिश करानी पड़ रही है।
 
वहीं, देश में कई ऐसी रिफाइनरीज हैं, जिनके क्षेत्र में क्रूड ऑयल नहीं है और उनका उत्पादन आयातित क्रूड ऑयल पर निर्भर रहता है। देश के 14 राज्यों में 25 रिफाइनरीज हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में ही क्रूड ऑयल निकलता है।
 
इस श्रंखला में अब राजस्थान का भी नाम जुड़ गया। राजस्थान में उत्पादित 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) क्रूड ऑयल देश के कुल उत्पादन में 20 प्रतिशत की भागीदारी निभाता है। इससे देश को तेल के आयात में 1.7 अरब डॉलर तक कम करने में मदद मिलती है। जल्द ही यह मात्रा 3 लाख बीपीडी होने जा रही है, जिसकी मंजूरी मिल चुकी है। 
 
क्यों चाहिए रिफाइनरी? 
 
बाड़मेर-सांचौर बेसिन में कच्चे तेल के अथाह भंडार है। इन्हें देखते हुए यहां रिफाइनरी लगाने के लिए हमारा दावा मजबूत है। अब तक की खोज और अनुमोदित अनुमानों के अनुसार इस क्षेत्र में 7.3 बिलियन बैरल (757.44 मिलियन टन) तेल भंडार हैं। अगर यहां 9 मिलियन टन सालाना क्षमता की रिफाइनरी लगाई जाए तो अगले 40 साल तक रिफाइनरी की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।
 
यहां 25 ऑयल फील्ड हैं, जिनमें से मंगला, भाग्यम, सरस्वती और रागेश्वरी फील्ड से 1.75 लाख बैरल का उत्पादन हो रहा है। केंद्र सरकार ने यहां केयर्न इंडिया को तेल खोज के लिए 100 और तेल कुएं खोदने की मंजूरी दे दी। राज्य के पेट्रोलियम मंत्री राजेंद्र पारीक कहते हैं कि रिफाइनरी के लिए प्रयास तेज कर दिए और 5 मार्च को होने वाली बैठक में सकारात्मक परिणाम आने की संभावना है। 
 
फायदा क्या?
 
 
 
 रिफाइनरी से निकलने वाले 11 से अधिक बायप्रोडक्ट्स से 129 तरह के उत्पाद के उद्योग लग सकते हैं। 
 7 से 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार। 
 
 अगर वर्तमान मूल्यों की ही आधार माना जाए तो रिफाइनरी लगने के बाद रॉयल्टी व वैट के रूप में राज्य को 15 से 20,000 करोड़ रुपए सालाना आय की उम्मीद की जा रही है।
 पॉलीप्रॉपीलीन की यूनिट लगे तो प्लास्टिक, पैकेजिंग व लेबलिंग, टेक्सटाइल्स, स्टेशनरी और री-यूजेबल कंटेनर्स के लिए ही कच्चा माल मिल सकेगा।
 
 
 क्या हैं क्रूड ऑयल के बायप्रोडक्ट्स
 
रिफाइंड करने पर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी), गैसोलीन (पेट्रोल), नैफ्था, केरोसीन व जेट एयरक्राफ्ट फ्यूल, डीजल फ्यूल, फ्यूल ऑयल, लुब्रिकेंट ऑयल, पैराफीन वैक्स, अस्फाल्ट व तार, पेट्रोलियम कोक और सल्फर आदि। हाइड्रोजन, लाइट हाइड्रोकार्बन्स, री फॉर्मेट और पाइरोलाइसिस गैसोलीन आदि आंतरिक उत्पाद भी निकलते हैं।
 
 
 कहां-कहां लगी हैं रिफाइनरीज
 
असम: बोंगईगांव, डिगबोई, गुवाहाटी, नुमालीगढ़। बिहार: बरौनी। गुजरात : एस्सार, वडोदरा, जामनगर। हरियाणा: पानीपत। कर्नाटक: मंगलौर। मध्य प्रदेश: बीना। पंजाब: बठिंडा। पश्चिमी बंगाल: हल्दिया। उड़ीसा: पारादीप। उत्तर प्रदेश: मथुरा। महाराष्ट्र: मुंबई (एचपीसीएल), (बीपीसीएल)। आंध्र प्रदेश: विशाखापत्तनम, टाटीपाका, यानम (रिलायंस), काकीनाड़ा, अमरापुरम, केयर्न एनर्जी, अमालपुरम। केरल: कोची। तमिलनाडु: चेन्नई, कुड्डलोर, नागपट्टनम।