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जिंदगी खा रहा है गुटखा, सरकार दबाए बैठी पाबंदी

9 वर्ष पहले
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जयपुर. देश में एक के बाद एक राज्य गुटखा और तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। पांच राज्य ऐसा कर भी चुके हैं, लेकिन राजस्थान सरकार न जाने किस उलझन में है। अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। स्वास्थ्य विभाग से लेकर मुख्य सचिव तक कुछ भी साफ कहने की स्थिति में नहीं है। सवाल उठ रहा है कि कहीं 100 करोड़ के राजस्व और गुटखा लॉबी के दबाव में तो सरकार लोगों के जीवन से खिलवाड़ नहीं कर रही। तंबाकू और गुटखा के कारण हजारों लोग कैंसर और अन्य घातक बीमारियों से पीड़ित हैं। खुद मुख्यमंत्री विधानसभा में गुटखे के दुष्प्रभावों को लेकर खूब बोल चुके हैं इसके बावजूद उनके स्तर पर पाबंदी की पहल नहीं हुई है। मुख्य सचिव सी.के. मैथ्यू कहते हैं-गुटखा पर प्रतिबंध का मामला अभी विचार-विमर्श के चरण में ही है। मुख्यमंत्री स्तर पर विचार के बाद ही इसमें कोई फैसला होगा, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। नियम भी ताक पर केंद्र का फूड सेफ्टी एक्ट लागू होने के बाद तंबाकू के साथ किसी भी खाद्य पदार्थ को मिलाकर नहीं बेचा जा सकता। यह कानूनी अपराध बन गया है। इस कानून के बाद हर राज्य को गुटखा के उत्पादन और बिक्री पर पाबंदी लगाना संवैधानिक बाध्यता बन चुका है। इसके बाद भी राज्य सरकार का मौन समझ से परे है। महज 100 करोड़ रु. के लिए कैंसर बांट रही सरकार बैन में दिक्कत क्या है? गुटखा लॉबी का दबाव माना जा रहा है कि गुटखे पर पाबंदी नहीं लगने में सबसे बड़ी बाधा ताकतवर गुटखा लॉबी है। तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध के लिए काम कर रहे स्वयंसेवी संगठन राजस्थान वालंटरी हैल्थ एसोसिएशन के परियोजना निदेशक विक्रम सिंह राघव का कहना है कि यह गुटखा लॉबी का ही दबाव है कि केरल जैसा छोटा राज्य प्रतिबंध लगा चुका है, लेकिन राजस्थान सरकार फैसला नहीं कर पा रही है। कमाई का लालच गुटखा और पान मसाला से 2011-12 में 105.04 करोड़ का राजस्व मिला। इसमें अकेले गुटखे का राजस्व 70 करोड़ सालाना के आसपास है। तंबाकू, पान मसाला, गुटखा, बीड़ी और सिगरेट पर सरकार ने पिछले तीन साल में टैक्स तीन गुना से ज्यादा बढ़ाया लेकिन इनकी बिक्री कम नहीं हुई। इस बार राज्य सरकार ने गुटखा-तंबाकू पर वेट बढ़ाकर 40 से 50 फीसदी कर दिया है। डॉक्टरों ने कहा- प्रतिबंध ही इलाज वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय बापना का कहना है कि लंबे समय तक गुटखा सेवन से मुंह खुलना धीरे-धीरे कम होता जाता है। कई मरीजों में तो स्थिति यहां तक पहुंच जाती है कि केवल निडल के सहारे ही खाना दिया जा सकता है। बापना के अनुसार गुटखा-तंबाकू खाने वालों का मुंह पहले खुलना कम होता है। इसके बाद मुंह में सफेद परत जमा हो जाती है या सफेद चकत्ते उभर आते हैं। इस अवस्था को फाइब्रोसिस कहते हैं। फाइब्रोसिस के बाद अगली स्टेज ल्यूबोक्लोसिया आती है। कुछ ही साल में यह स्थिति कैंसर में बदल जाती है। तंबाकू-गुटखे पर टैक्स बढ़ाने से कोई फायदा नहीं होने वाला इन पर तत्काल प्रतिबंध ही एकमात्र उपाय है। एसएमएस अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. ओपी शर्मा का मत भी यही है।















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