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आठ हजार प्रधानाध्यापक फिर बनेंगे सामान्य शिक्षक

9 वर्ष पहले
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जयपुर.शिक्षा विभाग में पिछले दो साल से ज्यादा समय से पातेय वेतन पर प्रधानाध्यापक बने करीब 8 हजार शिक्षकों को जल्द ही पद से हटना पड़ेगा। ये पद वे शिक्षक संभालेंगे जो उनसे ज्यादा सीनियर हैं और विभाग की चल रही डीपीसी की वरिष्ठता में उनसे ऊपर आएंगे। डीपीसी पूरी होने के बाद होने वाले नए पदस्थापन में पातेय वेतन पर लगे ऐसे जूनियर प्रधानाध्यापक अपनी सीट खोते हुए फिर से सामान्य शिक्षक बन जाएंगे।
प्रदेश में अरसे से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया से स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था गड़बड़ाने से 2009-10 में पातेय वेतन पर करीब 18 हजार शिक्षकों को प्रधानाध्यापक बनाया गया था।
इनमें करीब आठ हजार ऐसे हैं जो वरिष्ठता सूचियों में नीचे आएंगे। हालांकि कई वरिष्ठता सूचियों में ऊपर बने रहने के कारण अपनी कुर्सी बचाए रखने में कामयाब रहेंगे। संभागवार व महिला शिक्षकों की सम्मिलित वरिष्ठता सूचियां बनाने के कारण अब नए समीकरण बन गए हैं। पातेय वेतन पर प्रधानाध्यापक बनने वालों में तृतीय श्रेणी के साथ ही द्वितीय श्रेणी के शिक्षक शामिल थे। कई व्याख्याताओं ने भी यह पद हासिल किया था।
विभाग ने पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने से पहले पिछले दिनों वरिष्ठता सूचियों में नाम दर्ज कराने के लिए प्रपत्र भरवाए थे। बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक सूचियों में शामिल हुए जिन्होंने पातेय वेतन पर हुई पदोन्नतियों में अपना नाम जुड़वाया ही नहीं था। इनमें बड़ी वजह उसी वेतन पर काम करने की बाध्यता थी। प्रधानाध्यापक पदों के लिए डीपीसी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नए पदस्थापन अगले दो माह में होने की संभावना है। विभिन्न स्तरों पर चल रही डीपीसी के कारण विभाग में खाली पद जल्द भरेंगे। नियमानुसार नए पदस्थापन किए जाएंगे।
पहले बॉस थे, अब अंडर में काम करेंगे
डीपीसी के बाद नए पदस्थापनों से प्रदेश का शैक्षिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा। स्थिति यह भी बनेगी कि पातेय वेतन पर हैडमास्टर के रूप में काम कर रहे कई शिक्षक अब खुद अपने मातहत के नीचे काम करेंगे, यानि उनके जूनियर अब कुर्सी संभालेंगे।माध्यमिक स्कूलों में पातेय वेतन पर करीब एक हजार वरिष्ठ शिक्षकों को भी सामान्य शिक्षक के रूप में फिर से नई पारी शुरू करनी पड़ेगी।