जयपुर। शहर सरकार सफाई पर सालाना 300 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसमें 218 करोड़ रुपए तो सिर्फ सफाई कर्मचारियों के तनख्वाह और भत्तों पर खर्च होता है। निगम के पास 5400 सफाई कर्मचारियों की फौज है। सफाईकर्मी की एक माह की औसत तनख्वाह करीब 20 हजार रुपए हैं। हैरान करने वाली बात तो यह है कि 500 से ज्यादा कर्मचारियों ने अपने काम के िलए कर्मचारी तैनात कर रखे हैं। ये लोग बदले में इन्हें 2 से ढाई हजार रुपए दे देते हैं। और यह सब हो रहा है मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों की मिलीभगत से।
यानि, बिना काम किए कर्मचारियों को मोटी तनख्वाह मिलती है और नुकसान हो रहा है। आम शहरी का जो इन सुविधाओं के िलए टैक्स देता है। कारण जो कर्मचारी 2 हजार महीने की पगार पर काम करेगा, वे सिर्फ दो घंटे ही अपनी सेवा दे सकता है। यही वजह है कि जयपुर शहर की सफाई अन्य मेट्रो सिटी के मुकाबले कई गुना पीछे है।
नाम है एवजी, बस रिकार्ड में नहीं
सीएसआई-एसआई ने ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित करके इन्हें नाम भी दिया हुआ है एवजी यानि स्थायी कर्मचारी के एवज में काम करने वाला? बस इनका रिकार्ड नहीं रखा जाता। बड़ा सवाल यह है कि हर महीने काम पर नहीं आने के बावजूद उनकी हाजिरी वेरिफाई कौन करता है। जबकि यह कर्मचारी ही स्थायी कर्मचािरयों की उपस्थिित दर्ज करवाते हैं।
रविवार को सफाई कर्मचारियों के साथ एवजी भी अवकाश पर
रविवार को भास्कर ने सफाई के हालात देखे तो सामने आया कि कुछ हिस्से में सफाई हो रही है। कारण, स्थाई सफाई और एवजी कर्मचारी छुट्टी पर रहते हैं। चारदीवारी के हवामहल जोन पूर्व, जोन पश्चिम और मोतीडूंगरी से 198 मैट्रिक टन ही कचरा एकत्र हुआ जबकि रोजाना 550 मैट्रिक टन कचरा यहां पहुंचता है।
हाजिरी में कमीशन की बंदर बांट :
सफाईकर्मी की हाजिरी जमादार द्वारा हाजिरी गाह पर रखे रजिस्टर में दर्ज की जाती है। यहां स्वास्थ्य निरीक्षक हाजिरी की जांच करता है। और हाजिरी रजिस्टर को जोन आफिस भेजता है। जोन में बाबू कंप्यूटर से हाजिरी दर्ज करता है।
केस एक
हां, एवजी हूं, पर रोज 2 घंटे करता हूं सफाई
बनवारीलाल, नशे में लालजी सांड का रास्ता के भीतर से ट्रॉली लेकर आता मिला। ड्यूटी पर शराब पीने की बात पर उसने बताया कि वह एवजी कर्मचारी है। स्थायी कर्मचारी का काम कर रहा है। वह रोज 2 घंटे सफाई काम करता है।
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