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डाउनलोड करेंजयपुर। राजस्थान के पांच आईएएस अफसरों का चयन अगले साल के इंडो-नेपाल माउंट एवरेस्ट सिविल सर्विसेज एक्सपेडीशन के लिए हुआ है। ये अफसर हैं- राजस्थान स्किल एंड लाइवलीहुड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन के एमडी डॉ. राजेश यादव, एलबीएस एकेडमी मसूरी की सीनियर डिप्टी डायरेक्टर रोली सिंह, राजसमंद कलेक्टर डॉ. प्रीतम बी. यशवंत, भरतपुर कलेक्टर डॉ. नीरज के पवन और सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. मंजीत सिंह। ये मई, 2014 में माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराएंगे। इनके साथ सिक्किम कैडर के युवा आईएएस डॉ. विक्रम जिंदल भी जाएंगे। जिंदल देश के पहले आईएएस अफसर हैं, जिन्होंने 2013 में एवरेस्ट फतह किया है।
दो माह का अभियान, हर व्यक्ति पर 18 लाख खर्च
यह अभियान दो महीने का होगा। इससे पहले उन्हें प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। प्रति पर्वतारोही 18 लाख रु. खर्च होंगे, जो पर्वतारोहण को प्रोत्साहन देने वाली संस्था और भारत सरकार देगी। भारत सरकार के कैबिनेट सेक्रेटरी अजित कुमार सेठ पर्वतारोहण में प्रशिक्षित हैं और वे नेपाल सरकार के आला अफसरों के साथ मई 2013 में बेस कैंप से ऊपर कैंप टू तक जाकर आ चुके हैं। इसके बाद ही आईएएस अफसरों को एवरेस्ट पर भेजने की योजना शुरू हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव रजत मिश्रा और प्रीतम बी. यशवंत प्रशिक्षित पर्वतारोही हैं।
राजस्थान शुरू से रहा है एवरेस्ट के शिखर पर
श्रीगंगानगर के कर्नल एएस चीमा देश के पहले पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 1965 में माउंट एवरेस्ट अभियान का नेतृत्व किया और सफल रहे थे। चीमा को पद्म श्री और अर्जुन अवार्ड मिला था।
अलवर के कर्नल सौरभ शेखावत तीन बार एवरेस्ट को फतह कर चुके हैं। चूरू के गौरव शर्मा, सीकर के महावीरसिंह, जयपुर की नेहा भटनागर आदि ने भी एवरेस्ट फतह किया है।
क्यों है इस अभियान का महत्व?
इस अभियान में इंटरनेशनल हिमालयन एनवायरमेंट ट्रस्ट के प्रतिनिधि भी जाएंगे। इसके संयोजक भागचंद सोनी हैं। भारत सरकार के युवा और खेल मंत्रालय का मानना है कि ओलंपिक एशियन और कॉमनवैल्थ गेम्स में मेडल प्राप्त करना आसान है, लेकिन एवरेस्ट फतह करना मुश्किल। एवरेस्ट की ऊंचाई करीब 8850 मीटर है और यहां का तापमान माइनस 70 डिग्री सेल्सियस है। इन बर्फीली चोटियों पर खड़ा होना तक मुश्किल है।
क्या कहा आईएएस अधिकारियों ने
मुझसे पूछा था। मैंने मौखिक मंजूरी दे दी है।
डॉ. मनजीतसिंह
मैं एवरेस्ट फतह करने के लिए आशान्वित हूं और इस अभियान में जरूर जाऊंगा।
नीरज के पवन
मुझसे पूछा गया था और मैंने हामी भर दी है। एवरेस्ट के शिखर को छूने का मौका मिले तो इसे कौन छोड़ेगा! राजेश यादव
मैं प्रशिक्षित पर्वतारोही हूं। मुझे निमंत्रण मिला तो मैंने हां कह दी है। मेरे लिए यह काफी रोमांचक होगा।
प्रीतम बी. यशवंत
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