जयपुर. भारत के प्रदेश राजस्थान की राजधानी जयपुर जिसे भारत का पैरिस कहा जाता है। प्राचीन समय में राजपूताना के नाम से विख्यात राजस्थान अपनी सुंदरता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। यहां के स्थलों में इसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत की भव्यता झलकती हैं। यही कारण है कि यहां आने वाला हर देशी-विदेशी पर्यटक अपने साथ सुनहरी यादें समेटकर ले जाता है। राजपूताना के राजसी ठाटबाट की झलक दर्शाने वाले प्रमुख ऐतिहासिक किलों एवं महलों में से एक है आमेर का महल।
dainikbhaskar.com झलक राजस्थान की सीरीज के तहत इस महल की भव्यता के बारे में बता रहा है... जिसकी सुंदरता के बिल क्लिंटन भी रह चुके हैं कायल
यह महल अपनी विशालता, भव्यता और सुंदरता के कारण दुनिया के गिने-चुने दुर्गों में से एक माना जाता है। मावठा झील के किनारे बने इस महल के प्रवेश द्वार की भव्यता को देखकर ऐसा लगता है मानो सोने की प्लेट पर हीरे मोती जड़ दिए हों और उन्हें पत्थर की दीवार पर सजा दिया गया हो। इसकी सुंदरता इतनी थी कि ईर्ष्या वश मुगल बादशाह जहांगीर भी नाराज हो गया था। जहांगीर इसे निस्तेनाबूत करने के इरादे निकला। उससे छुपाने के लिए मानसिंह ने इन महलों की दीवारों पर प्लास्टर करवा दिया था। दीवारों पर बने चित्र धीरे-धीरे प्लास्टर उखड़ने से अब दिखाई देने लगे हैं।
बनने में लगे 100 साल
आमेर महल का निर्माण महाराजा सवाई मानसिंह ने वर्ष 1592 में आरंभ कराया था। इस महल का निर्माण कई चरणों में कई पीढ़ियों ने कराया। कहा जाता है कि इसे बनने में 100 साल से भी अधिक लगे। इसका निर्माण कार्य माहाराजा मानसिंह ने आरंभ किया था। अकबर के दाएं हाथ माने जाने वाले महाराजा मान सिंह बादशाह अकबर कि सेना में मुख्य सेनापति और उनके नौ रत्नों में से एक थे। उनके बाद राजा जयसिंह प्रथम ने आमेर महल के अन्य हिस्सों का निर्माण कराया।
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