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डाउनलोड करेंजयपुर. प्रदेश के बाड़मेर क्षेत्र में केयर्न को दो और बड़े तेल भंडार मिले हैं। दोनों भंडारों में से प्रत्येक की क्षमता 25 से 35 करोड़ बैरल आंकी जा रही है। ये दोनों तेल क्षेत्र कवास से जोधपुर के रास्ते में उत्तर पूर्व दिशा में स्थित हैं। भू-वैज्ञानिकों की भाषा में इस क्षेत्र को बाड़मेर हिल फॉर्मेशन कहा जाता है। इन दोनों तेल क्षेत्रों की नई खोजों से राजस्थान ने देश के तेल भंडारों में बड़ा स्थान बना लिया है। केयर्न की बाड़मेर क्षेत्र में अब तक की खोज से मिले तेल क्षेत्रों की कुल क्षमता 4.2 अरब बैरल है।
नई तेल खोजों की घोषणा केयर्न के अधिकारियों ने शुक्रवार को अपनी तीसरी तिमाही की रिपोर्ट जारी करते हुए की है। यह भी जानकारी मिली है कि अगले दो-तीन महीनों में राजस्थान का बाड़मेर क्षेत्र देश में सबसे ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन करने वाला राज्य बन जाएगा। फिलहाल देश में सबसे ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन सवा दो लाख बैरल प्रतिदिन बॉम्बे हाई से ओएनजीसी करता है।
केयर्न के अधिकारियों ने भास्कर को बताया कि नए तेल क्षेत्र इतने बेहतर हैं कि इससे राजस्थान की तकदीर चमक जाएगी। इन क्षेत्रों में जांच के दौरान तेल का प्रवाह लगभग 450 बैरल प्रतिदिन पाया गया। केयर्न फिलहाल प्रदेश में 1.85 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हर रोज कर रही है।
इससे हर रोज प्रदेश को सात से आठ हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। इस राजस्व की सालाना औसत 2500 करोड़ के आसपास है। पिछले छह साल में कच्चे तेल से करीब 15000 करोड़ का राजस्व प्रदेश सरकार को केयर्न से मिल चुका है। केयर्न के अधिकारियों के अनुसार अब तक कुल 200 तेल कुएं ड्रिल किए गए थे।
अभी 5 तेल क्षेत्र
मंगला, भाग्यम, गुड़ा, ऐश्वर्या, सरस्वती।
450 बैरल प्रतिदिन तेल प्रवाह पाया गया है पांचों में
1.85 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हर रोज कर रही है केयर्न
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