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डाउनलोड करें(फाइल फोटो आमेर महल।)
आमेर/ जयपुर. आमेर महल में बिना अनुमति के ड्रोन स्काई कैमरे से फोटोग्राफी व वीडियो बनाते वक्त पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों ने यूक्रेन के दो युवकों को पकड़ा। पूछताछ के दौरान ही एक युवक ने खुद को सेना में कर्नल बताकर दोनों को छुड़ाकर दिल्ली चला गया। संदेह होने पर महल अधीक्षक की सूचना पर हरकत में आई पुलिस ने तत्काल पीछा कर उन्हें दिल्ली से पकड़ा। शुक्रवार तड़के उन्हें जयपुर लाया गया।
पूछताछ में खुद को कर्नल बताने वाले युवक के मार्च, 2013 में सेना से बर्खास्त मेजर होने का पता चला। उसका परिचय पत्र भी फर्जी निकला। तब आमेर थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वह वैशाली नगर में भी विदेशी युवती नैंसी से ठगी में गिरफ्तार हुआ था। करीब डेढ़ साल जेल में रहा है। जबकि दोनों विदेशी पर्यटकों से जुर्माना वसूलकर छोड़ दिया गया। थानाप्रभारी धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सौरभ सहारन (33) मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है। इन दिनों दिल्ली में रह रहा है।
वह यूक्रेन निवासी महिला राडिया और उसके दो साथी माई कोला तथा सेव चसेन के साथ गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे आमेर महल पहुंचा। यहां विदेशी माई कोला व सेव चसेन ने बिना महल प्रशासन की अनुमति के आमेर के जलेब चौक में बलिदान गेट के पास ड्रोन स्काई कैमरे से फोटो व रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। उन्होंने करीब 8 मिनट 51 सैकंड की रिकॉर्डिंग की। जयगढ़ के नजदीक ही वायुसेना का राडार भी था।
सेना का फर्जी आईडी कार्ड दिखा विदेशियों को ले गया
विदेशी युवकों से पूछताछ के दौरान सौरभ सहारन वहां पहुंच गया। उसने आईडी कार्ड दिखाते हुए खुद को कर्नल बताया। सौरभ ने विदेशियों को खुद का परिचित बताया और अनजाने में ड्रोन कैमरा चलाने पर माफी मांगते हुए उन्हें साथ ले जाने की बात कही। सौरभ ने कैमरे में लगे मेमोरी कार्ड को महल प्रबंधन को दे दिया और वीडियो व फोटोग्राफी डिलीट करवा दी। कर्नल सौरभ से उनके परिचय पत्र की फोटोकॉपी देने को कहा तो उसने भारतीय सेना के नियम विरुद्ध बताकर सिर्फ मोबाइल नंबर दिए। इसके बाद विदेशी साथियों को लेकर चला गया।
महल अधीक्षक ने शक पर पुलिस को बताया
महल अधीक्षक पंकज धीरेंद्र ने संदेह होने पर होमगार्ड जवान विजय पारीक को कर्नल व दोनों विदेशियों के पीछे भेजा। विजय ने देखा कि वे दिल्ली व राजस्थान नंबर की दो कारों में बैठकर गए हैं। उनके साथ दो महिलाएं भी थीं। आईबी के हाईअलर्ट को भांपकर पंकज ने अपने परिचित सेना अधिकारी से बातचीत की। तब सौरभ का कोर्ट मार्शल होने व सजा मिलने का पता चला। पंकज ने सौरभ के बारे में इंटरनेट से जानकारी जुटाई। मोबाइल पर फोन किया तो सौरभ ने जवाब नहीं दिया। ट्रू कॉलर पर सर्च किया तो लीगल लिखा आया। तब पंकज ने थानाप्रभारी धर्मेंद्र शर्मा को सूचना दी।
इस तरह पकड़ा : थानाप्रभारी ने बताया कि उन्होंने पार्किंग से गाड़ियों के नंबर लिए। जिनमें सौरभ व विदेशी घूमने आए थे। इनमें एक गाड़ी जयपुर निवासी एक ट्रैवल संचालक सोहेल की थी। उसने सौरभ को पहचानने की बात कही। तब थानाप्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम दिल्ली रवाना हो गई। पुलिस ने आरोपी सौरभ व उसके परिचितों को होटल से पकड़ा। यहां पहुंचने पर केंद्र, राज्य व सेना की गुप्तचर एजेंसियों ने सौरभ व दोनों पर्यटकों से पूछताछ की, लेकिन इसमें कोई जासूसी की बात पुष्ट नहीं हो सकी। इस पर विदेशी पर्यटकों से जुर्माना वसूला गया।
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