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डाउनलोड करेंजयपुर ।गबन मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की नई एफआईआर में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन सुभाष गर्ग का भी नाम है। एसीबी द्वारा आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार बोर्ड के वित्तीय सलाहकार नरेंद्र तंवर ने खुलासा किया है कि वे गर्ग के कहने पर ही बोर्ड का पैसा इधर-उधर करते थे। एसीबी ने तंवर और नोएडा के कारोबारी अजय जेडका के खिलाफ गबन, पद के दुरुपयोग, आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर नया केस दर्ज किया है। इसी में गर्ग का नाम भी है। इससे पहले तंवर के खिलाफ 15 मार्च को एक एफआईआर दर्ज की गई थी।
तंवर बोर्ड के खातों से लाखों रुपए कर्नाटक के मदिकेरी में अपने भाई मोहन तंवर की अदरक और कालीमिर्च की फर्म के नाम जमा करा रहा था। विभिन्न खातों में जमा कराई गई गबन की यह राशि फिलहाल 11 करोड़ रुपए आंकी गई है। छानबीन में इसके और ज्यादा होने की संभावना है।
तंवर ने पूछताछ में एसीबी को बताते था कि तत्कालीन चेयरमैन सुभाष गर्ग के जुबानी निर्देश पर उसने अजय जेडका की पिरामिड कंपनी और जेडका की बताई अन्य कंपनियों के नाम बोर्ड के खातों से चेक जारी किए थे। गर्ग की नियुक्ति मौजूदा कांग्रेस सरकार के समय हुई थी। प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन का नाम एफआईआर में आया है।
अनजान बने रहे बोर्ड के चेयरमैन और अधिकारी
एसीबी की जांच में सामने आया कि तंवर बोर्ड के 54 करोड़ रु. की एफडीआर से संबंधित सभी खाते अपने घर से चलाता रहा और बोर्ड के अधिकारी अनजान बने रहे। उसने बैंक ऑफ बड़ौदा की वैशालीनगर अजमेर शाखा में खाता नंबर 17370100014573 सचिव माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के जरिए खुलवाया था। इस खाते में पीएनबी की एक शाखा से 8 व 9 अक्टूबर 2012 को 5,46,83,763 रुपए और 5,46,96,539 रुपए की एफडीआर की राशि जमा कराई।
इस राशि को अगले ही दिन तंवर ने आठ खातों में चेक काटकर जमा करा दिया। एसीबी ने तंवर के घर की तलाशी ली तो स्वयं, पत्नी मंजू और पुत्र प्रियांशु के नाम विभिन्न बैंक खातों की चेक बुक, जमा रसीदें और अन्य दस्तावेज मिले। इसके बाद बैंकों से स्टेटमेंट लिया गया तो पूरा मामला खुल गया। एसीबी ने पांच खातों की डिटेल हासिल की।
बोर्ड का पैसा खुद लूटा, रिश्तेदारों में भी लुटाया
तंवर ने बोर्ड के खाते से चेक काटकर जयपुर के वर्धमान नगर में 25 लाख रु. का मकान खरीदा। हाउसिंग बोर्ड के मकान की किस्त के पैसे भी चुकाए। यह राशि 4.65 लाख रुपए थी। तंवर ने बोर्ड का पैसा साढ़ू अशोक कुमार, पत्नी मंजू, भाई राजकुमार, भाभी विमला, भतीजे दिलीप, भतीजी मिताली, साली अंजू और नीतू, दोस्त पुष्कर मिश्रा, हीरानंद मिश्रा, विमलेश मिश्रा, राजेश कौशिक आदि पर भी लुटाया।
गर्ग ने रुकवाया था तंवर का तबादला
बोर्ड से नरेंद्र तंवर का तबादला हुआ तो चेयरमैन की हैसियत से गर्ग ने 31 मार्च 2011 को मुख्य सचिव सीके मैथ्यू को डीईओ लेटर लिखा था। इसमें तर्क दिया गया था कि तंवर के बिना बोर्ड का काम नहीं चलेगा।
सुभाष गर्ग, तत्कालीन चेयरमैन, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर
इन फर्मों को किया गया भुगतान
पिरामिड आईटी नोयडा 3.10 करोड़ रुपए
माइक्रो इन्फो सोल्यूशन दिल्ली 90 लाख
अशोक तंवर 1 लाख
जाजोट एंटरप्राइजेज अजमेर 1.80 लाख
शांति ट्रेडिंग कंपनी कर्नाटक 5 करोड़ 92 लाख 59 हजार (सगे भाई की कंपनी)
त्रिलोक बंसल 2 लाख 10 हजार
उमासिंह जयपुर को मकान की खरीद के लिए 46.25 लाख
संदीप सिंह जयपुर को मकान खरीद के लिए 5 लाख रुपए
आरएस डाटा सोल्यूशन 20 लाख
पैसिफिक ट्रेड लिंक 30 लाख
एयरोमरीन 15 लाख
तंवर झूठ बोल रहा है : सुभाष गर्ग
बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन सुभाष गर्ग ने कहा कि नरेंद्र तंवर झूठ बोल रहा है। बोर्ड ने विवादित पेमेंट तत्काल बंद कर दिए थे। तंवर की जगह लगाया गया व्यक्ति उपयुक्त नहीं था, इसलिए तंवर का तबादला कुछ समय रोकने के लिए मैंने मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। मेरा मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
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