जयपुर. सरकारी लापरवाही और लालफीताशाही की एक बानगी देखिए। एक साल पहले राज्य सरकार ने 100 एम्बुलेंस खरीदी, लेकिन खरीदकर भूल गई। एम्बुलेंस 8 करोड़ में खरीदी गई थीं। मकसद था- लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना। सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को बचाना।
अब जरा इस तथ्य पर भी गौर करें। एम्बुलेंस को अक्टूबर 2013 में खरीदा गया था। कंपनी से तुरंत डिलीवरी भी हो गई, लेकिन ये एंबुलेंस पिछले एक साल से अजमेर रोड पर टाटा मोटर्स के एक अहाते में धूल फांक रही हैं। हैरानी यह है कि इनके बारे में न सरकार के मंत्री को मालूम है और न ही किसी अफसर को। भास्कर ने इन सौ एंबुलसेंज को सात िदन की खोज के बाद ढूंढ़ निकाला।
जानिए क्यों भूल गए...
एंबुलेंस खरीदी जानी थी जुलाई-अगस्त, 2013 में लेकिन विलंब होता रहा। अक्टूबर में खरीद हुई तो चुनाव आ गए। पिछली सरकार के लोग चुनाव में जुट गए। चुनाव खत्म हुए तो नई सरकार सत्ता में आ गई। मंत्री, प्रमुख सचिव व एनआरएचएम के प्रमुख भी बदल गए। इस बीच कंपनी ने ऑर्डर की डिलीवरी कर दी। निचले स्तर के अफसरों ने एंबुलेंस को कंपनी के वर्कशॉप पर ही रहने दिया। इसके बाद वे भी भूल गए। एंबुलेंस आज तक खड़ी हैं।
हर दस्तावेज और अफसरों की नोटिंग खंगाली, तब मिलीं एंबुलेंस
पूर्ववर्ती सरकार के समय 108 एम्बुलेंस घोटाले का खुलासा करने वाले एक भाजपा नेता ने एंबुलेंस खरीदी में गड़बड़ी का जिक्र किया लेकिन खुलकर बताने से किया इनकार। यहीं से भास्कर ने शुरू की पड़ताल।
तलाश- अफसरों से सवाल
सवाल-कहां हैं एंबुलेंस सबका एक जवाब-नहीं पता
मुझे जानकारी नहीं। आप प्रोजेक्ट डायरेक्टर से पूछिए।
-एसएस बोहरा, एनआरएचएम डायरेक्टर फाइनेंस
हमारे पास जगह नहीं है एंबुलेंस खड़ी करने की। न मुझे पता है कि एंबुलेंस हैं कहां?
-अंतर सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनआरएचएम
मुझे मालूम नहीं। एंबुलेंस की जानकारी तो कॉरपोरेशन में ईडी ही दे सकते हैं।
-नवीन जैन, एनआरएचएम एमडी
मुझे मालूम नहीं, एमडी से पूछकर बताता हूं।
-दीपक उप्रेती, प्रमुख सचिव
मुझे मालूम नहीं हैं कि हमारे पास एंबुलेंस हैं। मैं अफसरों से पूछता हूं।
- राजेंद्र राठौड़, चिकित्सा मंत्री
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