जयपुर. हाईकोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकार को आदेश दिया है कि राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर चलने वाले ओवरलोड वाहनों को केवल जुर्माना वसूलकर न छोड़ा जाए, बल्कि ओवरलोड माल खाली कराकर ही जाने दिया जाए। साथ ही, ऐसे वाहनों से उतारे गए ज्यादा सामान को सड़क से 20 फीट दूरी पर रखें ताकि ट्रैफिक में रुकावट न हो। आदेश का पालन नहीं करने पर अदालत ने अवमानना कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी व न्यायाधीश वीएस सिराधना की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश देश भूषण शर्मा व विक्रम सिंह की जनहित याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि ओवरलोड वाहन से उतारे गए ज्यादा सामान को वाहन मालिक दूसरे वाहन से ले जा सकता है।
अधिवक्ता निधि खंडेलवाल ने बताया बड़ी कंपनियां सीमेंट, स्टील व आयरन सहित अन्य सामान ओवरलोड वाहनों में ले जाते हैं। यातायात विभाग के अफसरों की मिलीभगत से इन वाहनों को राजमार्गो पर गैरकानूनी तरीके से परमिट मिल जाता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में राजस्थान सहित नौ राज्यों को ओवरलोड वाहनों के संबंध में दिशा-निर्देश बनाने की बात करते हुए कहा था कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 200 के तहत राज्य सरकार ओवरलोड वाहनों को परमिट देने के लिए अधिकृत नहीं है।
ऐसे वाहनों के कारण न केवल एक्सीडेंट बढ़ रहे हैं, बल्कि सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं, लेकिन परिवहन विभाग जुर्माना लगाने के बाद वाहनों को चलने की अनुमति दे देते हैं। ओवरलोडिंग पर पहले जुर्माना 20 हजार रु. था, जिसे बाद में घटाकर 18 हजार और अब 12500 रु. कर दिया गया है, लिहाजा इन वाहनों के संचालन पर पाबंदी लगाई जाए।
लीज धारकों को खान विभाग की निगरानी में स्टॉक बजरी बेचने की अनुमति
हाईकोर्ट ने बजरी खनन के मामले में प्रार्थी लीज धारकों को नियंत्रित दरों पर स्टॉक की गई बजरी के बेचने की अनुमति दे दी है। अदालत ने प्रार्थियों को कहा कि वे खान विभाग के निरीक्षण में बजरी का बेचान कर सकते हैं। साथ ही जिला कलेक्टर को इस संबंध में शपथ पत्र दें कि वे नियंत्रित दरों पर ही बजरी की बिक्री कर रहे हैं। न्यायाधीश एम.एन.भंडारी ने यह आदेश लीज धारक बनास रिसोर्सेज की याचिका पर दिया।
अदालत ने कहा कि प्रार्थी निरीक्षण के संबंध में खान विभाग में 50 हजार रुपए जमा कराए। हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर, 2013 को राज्य सरकार को पुरानी प्रणाली पर बजरी खनन की अनुमति की अवधि बढ़ाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद खान विभाग ने लीज धारकों के परमिट खत्म कर दिए थे और स्टॉक को सीज कर दिया था। प्रार्थी लीज धारकों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए स्टॉक बजरी को बेचने की गुहार की थी।