जोधपुर/जयपुर. हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी व न्यायाधीश विजय विश्नोई की खंडपीठ ने निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के कम वेतन पर हैरानी जताई है। साथ ही शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से प्रदेश के सभी निजी स्कूलों के शिक्षकों के वेतन के संबंध में चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है। खंडपीठ ने यह आदेश सेंट्रल एकेडमी स्कूल बीकानेर में टीचर सुनीता भटनागर की अवमानना याचिका पर सुनवाई के तहत दिए। साथ ही इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया।
भटनागर को प्रतिमाह साढ़े छह हजार रु. वेतन मिलने की जानकारी हुई तो खंडपीठ ने आश्चर्य जताया। जब उन्हें टीचर के एमए-बीएड की डिग्रीधारक होने के बारे में बताया गया कि तो और ज्यादा हैरत हुई। खंडपीठ ने इतने कम वेतन को अनुच्छेद 23 का सीधा उल्लंघन बताया। अदालत ने शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से यह भी पूछा है कि सरकार निजी स्कूलों के शिक्षकों के वेतन को लेकर कितना हस्तक्षेप रखती है? प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हेमंत दत्त ने पैरवी की।
यह था मामला : बीकानेर स्थित सेंट्रल एकेडमी स्कूल में कार्यरत तीन शिक्षिकाओं को वर्ष 1997 में हटा दिया गया था। वर्ष 1999 में नॉन गवर्नमेंट एजुकेशन ट्रिब्यूनल ने इन्हें वापस नियुक्त करने के आदेश दिए। इस पर स्कूल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की जिसे कॉस्ट के साथ खारिज कर दिया गया। इसके बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ और सुप्रीम कोर्ट में स्कूल प्रबंधन की अपील खारिज होने के बाद शिक्षकों को 1200-1200 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से एरियर का भुगतान किया गया। तीनों शिक्षिकाओं ने कम राशि का एरियर दिए जाने पर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी।