जयपुर. राज्य सरकार ने रविवार को प्रदेश की पर्यटन नीति का ड्राफ्ट तैयार कर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। इस नीति में नए होटल बनाने को लेकर कई सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। जमीन के लिए भू-रूपांतरण के आवेदन पर शहरी क्षेत्र में केवल 2 माह में ही आैर ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन में निपटारा कर दिया जाएगा। साथ ही बिल्डिंग प्लान भी दो महीने में ही स्वीकृत कर दिया जाएगा।
पर्यटन निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि यह नई पॉलिसी मौजूदा टूरिज्म यूनिट पॉलिसी-2007 का स्थान लेगी। नई पॉलिसी के ड्राफ्ट पर किसी भी प्रकार के सुझाव या टिप्पणियां 20 दिसंबर तक दिए जा सकते हैं। इसके लिए ईमेल-hotel-dot@rajasthan.gov.in पर या खासा कोठी स्थित पर्यटन विभाग के दफ्तर में पर्यटन निदेशक को लिखित में दिए जा सकते हैं। यह पॉलिसी 30 सितंबर 2019 तक के लिए लागू होगी।
नई पर्यटन नीति के प्रमुख बिंदु
उन ही होटल, मोटल, कैंपिंग साइट, होलीडे रिसोर्ट आदि को मंजूरी मिलेगी, जो यूडीएच, राजस्व और पंचायती राज नियमों का पालन करेंगे। इनमें न्यूनतम 20 कमरे वाले मोटल, 10 टेंट वाली कैंपिंग साइट, खेल, राइडिंग, स्विमिंग, सामाजिक गतिविधियों सहित होलीडे रिसोर्ट, एम्यूजमेंट पार्क, वन विभाग से स्वीकृत एनीमल सफारी, नियमों के तहत बने रोप-वे, एक करोड़ रुपए के निवेश व एक समय में 40 व्यक्तियों की सिटिंग वाले रेस्टोरेंट या कैफेटेरिया आदि शामिल होंगे। इनके अलावा स्पोर्ट्स रिसोर्ट, टूरिज्म लग्जरी कोच, कारवां, कन्वेंशन सेंटर, हेल्थ रिसोर्ट आदि के लिए भी इस तरह के अलग-अलग नियम होंगे।
अनुभव व टर्नओवर काे प्राथमिकता
सभी प्रकार की जमीन के लिए डीएलसी दरों पर आवंटन हो सकेगा। बजट व 1 से 3 स्टार होटलों के लिए कोई भी व्यक्ति आवेदन कर सकता है, जबकि 4 स्टार व उससे ऊपर के होटल के लिए आवेदक होटलियर या टूर ऑपरेटर होना जरूरी है। अनुभव व टर्नओवर के आधार पर ही आवेदन को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसी योग्यता नहीं रखने की स्थिति में आवेदक यदि किसी अन्य के साथ टाइअप करता है और उसके पास ये योग्यता हैं तो आवेदन कंसीडर किया जा सकेगा।
टूरिज्म ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर की ओर से 1 जनवरी 2015 के बाद खरीदी जाने वाली आईएटो व आरएटीओ से स्वीकृत टूरिज्म बसों पर स्पेशल रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी। यह 3 साल के लिए होगी।
होटलों के लिए भूमि का आवंटन
सभी विकास प्राधिकरण, यूआईटी, निकाय, हाउसिंग बोर्ड, ग्राम पंचायत, रीको, उद्योग विभाग व कलेक्टर अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी भूमि को चिन्हित करेंगे, जिन पर टूरिज्म यूनिट स्थापित किए जा सकते हों।
इस चिन्हित भूमि पर टूरिज्म यूनिट के लिए पर्यटन विभाग को विश्वास में लेना होगा। स्वीकृति लेनी होगी।
क्षेत्र भी निर्धारित।
बजट क्लास व 1 से 3 स्टार होटल : 1200 वर्गमीटर से 4000 वर्गमीटर तक
4स्टार होटल : 6000 वर्गमीटर से 12000 वर्गमीटर
5स्टार व उससे ऊपर के होटल : 18000 वर्गमीटर से 40,000 वर्गमीटर
अन्य टूरिज्म यूनिट : उपलब्धता व आवश्यकता के अनुरूप
एडवाइजरी कमेटी
पॉलिसी के तहत एक टूरिज्म एडवाइजरी कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी समय समय पर राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के सुझाव देगी।
विशेष स्थितियों में 1 वर्ष की अवधि बढ़ाई जा सकेगी
टूरिज्म यूनिट के लिए शहरी क्षेत्र में भूमि रूपांतरण और बिल्डिंग प्लान की स्वीकृति के लिए जिस प्रकार सरकारी तंत्र के लिए दो माह की समय सीमा निर्धारित की गई है, वैसी ही सीमा यूनिट बनाने वाले के लिए भी लागू की गई है। इसके तहत अधिकतम 200 कमरे वाले होटल के लिए 2 साल और इससे अधिक कमरे वाले होटल के लिए 3 साल में होटल भवन तैयार होना जरूरी होगा। दोनों ही केस में विशेष स्थितियों में 1 वर्ष की अवधि बढ़ाई जा सकेगी।
स्किल डवलपमेंट कार्यक्रम
इसके तहत आरएसएलडीसी से युवाओं को प्रशिक्षण देकर होटलों में लगाया जा सकेगा। साथ ही होटलों के लिए भी ऐसे कार्यक्रम उनके परिसर में आयोजित किए जा सकेंगे।