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सदन में गरजे गहलोत, घर में बरसीं वसुंधरा

9 वर्ष पहले
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अभिभाषण पर बहस के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा- आपराधिक मामले कभी खत्म नहीं होते, 5 साल बाद भी खुल सकते हैं मामले!
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत : मुझे गर्व है कि मैंने 4 साल में कभी ऐसी परिस्थिति नहीं बनने दी कि कोई इश्यू बने। न कोई फायरिंग हुई और न ही लाठीचार्ज हुआ।
राठौड़ से सीएम की नोक-झोंक होती है।
(राठौड़ के टोकने पर) गहलोत : आपकी परफॉर्मेस इतनी अच्छी है कि आपकी नेता आपको छोड़ेगी ही नहीं। आपके बिना उनका काम नहीं चल सकता।
राठौड़ : आपकी कृपा है।
गहलोत : मेरी कृपा तो पहले से ही है।
राठौड़ : उसका तो मैं भोग भी चुका।
गहलोत : वो तो आप अपने कर्मो का भोग रहे हो। आपको गलतफहमी है कि मैंने आपको फंसाया है। मैं तो कभी अपने दुश्मन को भी गलत तरीके से नहीं फंसा सकता। आपके नेताओं ने ही दिल्ली में मंत्रियों के यहां चक्कर लगाए थे, लेकिन मैंने अपनी जुबान नहीं खोली थी।
आपके नेताओं पर भी आरोप लगे हैं। बीकानेर हाउस और खासाकोठी से कालीन चोरी हो गए। आमेर की हवेलियों में मीनल मोदी और ललित मोदी के नाम थे। दोनों हवेलियां सरकार ने जब्त कर रखी हैं। आज तक कोई क्लेम करने नहीं आया।
ललित मोदी जो इस देश का भगोड़ा है। उसका पासपोर्ट खत्म हो चुका है। रेड कॉर्नर वारंट निकला हुआ है। आप क्या चाहते हो, सार्वजनिक जीवन में रहते हुए मैं उससे दोस्ती करूं। लंदन में उससे मिलने जाऊं। मैंने अपनी जिंदगी देश और समाज को ऐसे समर्पित की है कि आपकी सात पीढ़ियां भी मुझ पर करप्शन के आरोप नहीं लगा सकतीं।
राठौड़ : आपकी सरकार तो भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है। मैं आपके भ्रष्टाचार पर ब्लैक पेपर जारी करूंगा।
गहलोत : जलमहल मामले में तिवाड़ी जी ने कहा कि श्वेत पत्र जारी किया जाए। इस मामले में कानून अपना काम कर रहा है।
अगर नेता प्रतिपक्ष कटारिया जी तैयार हों तो देख लेंगे कि नंबर वन दोषी कौन हैं? माथुर आयोग के मामले में मैं पहले भी बार-बार कह चुका हूं कि वह आयोग हमने इंक्वायरी एक्ट में नहीं बनाया था। हम बदले की भावना से काम नहीं करना चाहते थे। केवल गलतियों को सामने लाने की बात थी, ताकि मेरी और आने वाली सरकार ऐसी गलतियां न करे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लोकायुक्त से जांच करवाने को कहा है। हमने फाइलें लोकायुक्त को भेज रखी हैं।
आपराधिक मामले कभी समाप्त नहीं होते। आरोपों की सच्चाई तो 5 साल बाद भी सामने आ सकती है। मैंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट से सरकार के पास के नोटिस आए हैं। मैं बताना चाहता हूं कि चारागाह की जमीन हड़पने का मामला हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगी थी। वहां से हाईकोर्ट और राज्य सरकार को भी नोटिस मिले हैं। चिंतन शिविर को लेकर 3.5 करोड़ के विज्ञापन देने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जो बेबुनियाद हैं। एक भी विज्ञापन नहीं दिया गया।
हम पहले ही कह चुके हैं कि इस आयोजन के खर्चो का भुगतान पार्टी करेगी। जहां तक स्टेट गेस्ट बनाने की बात हो तो तकनीकी रूप से केंद्रीय मंत्रियों को बनाना होता है। मध्यप्रदेश में जब भाजपा का ऐसा आयोजन हुआ था, तब वहां दिग्विजयसिंह कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे। तब केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ भाजपा की वर्किग कमेटी के सदस्यों को भी स्टेट गेस्ट बनाया था और रात्रि भोज भी दिया था।
मैं कटारियाजी का धन्यवाद करना चाहता हूं कि उनकी वजह से आज सदन में बोल पा रहा हूं। पहले तिवाड़ीजी थे तब बोला था। इससे पहले तो सदन के नेता को बोलने ही नहीं दिया गया। तब आपकी पार्टी के लोग कहते थे कि मैं तिवाड़ी जी से मिला हुआ हूं। अब लोग कहेंगे कि मैं आपसे (कटारिया से) मिला हुआ हूं।
जो करना है करो, मैं डरने वाली नहीं : वसुंधरा
मेरे खिलाफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कमीशन बिठा दिए, साढ़े चार साल तक खूब फाइलें खंगाली, हर दिन आरोप लगाए, लेकिन साढ़े चार सालों में एक भी आरोप सिद्ध नहीं कर पाए। हरियाणा और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्रियों का उदाहरण दिया। मैं ताल ठोक कर कह रही हूं कि मुख्यमंत्री को जो करना है करें, मैं डरने वाली नहीं हूं। मुख्यमंत्री ने पूरे साढ़े चार साल बौखलाहट में निकाले, स्तरहीन भाषा का इस्तेमाल किया।
कभी सीबीआई का इस्तेमाल किया तो कभी पुलिस का सहारा लिया। 21वीं सदी में आ गए है, कोई धमकियों में आना वाला नहीं है। चुनाव में छह माह रह गए हैं, इसलिए ये अब ऐसे कई षड्यंत्र रचेंगे। जो करना है करें मेरा फैसला तो जनता के हाथ में है। जनता ही मेरी जज है। इनके पास झूठ बोलने के अलावा दूसरा काम नहीं है। झूठी बातें करते हैं, झूठे वादे करते हैं।
हमने गुर्जरों सहित विशेष पिछड़ा वर्ग को पांच प्रतिशत और आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो को 14 प्रतिशत आरक्षण के लिए विधानसभा में सर्वसम्मति से बिल पास किया था। उसके इन्होंने टुकड़े कर दिए। सवर्णो में भी बीपीएल है, लेकिन इन्हें क्या मतलब। ये तो जातियों को लड़ाते हैं।
हम छत्तीस की छत्तीस कौमों को साथ लेकर चलते हैं। हम प्यार का मंत्र लेकर चलते हैं और लोगों को जोड़ने में विश्वास करते हैं। अब चुनाव आ रहे हैं इसलिए इन्हें महिलाएं भी याद आएंगी, तो किसान भी याद आएंगे। रोजगार के वादे तो करते हैं, पर रोजगार नहीं देते। अब पांचवें साल में सुनने में आ रहा है कि नौकरियां देंगे।
अब बजट में झूठी घोषणाएं करेंगे। विधानसभा चलती है तो विधानसभा के बाहर घोषणा कर देते हैं, लेकिन पूरी नहीं करते।