जयपुर. सरकार ने सोमवार को एक आदेश जारी कर नगर निगम के तत्कालीन सीईओ लालचंद असवाल को सस्पेंड कर दिया। कार्मिक विभाग ने यह आदेश जारी किए। नगर निगम के पूर्व एक्सईएन पुरुषोत्तम जेसवानी को एसीबी ने असवाल घर के बाहर से नगर निगम की 46 फाइलों और 15 लाख रुपए नकदी के साथ गिरफ्तार किया था। जेसवानी ने बताया था कि यह पैसा वह असवाल को देने आया था। इसके बाद एसीबी ने कमीशन लेने के आरोप में असवाल को 26 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया था।
13 साल पहले भी एसीबी ने असवाल को बचाया था
नगर निगम के तत्कालीन सीईओ लालचंद असवाल को बचाने में एसीबी ने भी 13 साल पहले कोई कसर नहीं छोड़ी थी। राजस्व को 14 लाख रुपए की चपत लगाने के सबूत मिलने के बाद भी भूखंड की नीलामी के मामले में एसीबी ने कोर्ट में एफआर लगाने के लिए फाइल पेश कर दी थी। लेकिन कोर्ट में मामला पेंडिंग पड़ा हुआ था। अब 13 साल बाद पिछले सप्ताह कोर्ट ने एसीबी को मामले की जांच वापस करने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने एसीबी की फाइल पर टिप्पणी की है कि असवाल के खिलाफ फाइल में कई सबूत है। कोर्ट के आदेशों के बाद एसीबी की कार्यशैली भी सवालों के कठघरे में खड़ी हो गई है।
डॉक्टर संग मिलीभगत कर बेशकीमती जमीन को नीलाम कर दिया
दरअसल एसीबी के सूत्रों ने बताया कि विद्याधर नगर जोन के शास्त्रीनगर में नगर निगम ने अक्टूबर 1993 में व्यवसायिक जमीन की नीलामी के लिए विज्ञापन निकाला था और तत्कालीन आयुक्त लालचंद असवाल ने एक डॉक्टर के साथ मिलीभगत करके आवासीय दर पर बेशकीमती जमीन को नीलाम कर दिया था। इससे राजस्व को 14 लाख रुपए की चपत लगी थी। तब इस जमीन पर निगम का एग्रो सर्विस स्टेशन बनाए जाना प्रस्तावित था। लेकिन असवाल ने नीलामी की शर्तों का उल्लंघन कर गुपचुप जमीन को नीलाम कर दिया।
जून 1998 में एसीबी ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में असवाल के खिलाफ एसीबी को ठोस सबूत भी मिले थे। लेकिन एसीबी ने मार्च 2000 में मामले में एफआर लगाने के लिए फाइल कोर्ट में पेश कर दी थी। यह मामला पिछले 13 साल से कोर्ट में अटका हुआ था। कोर्ट ने एफआर लगाने की स्वीकृति नहीं दी थी।
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