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पांच पूर्व जेडीसी सहित 17 अफसरों के खिलाफ जांच सरकार ने दिए जांच के आदेश

7 वर्ष पहले
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जयपुर. स्टेच्यू सर्किल के पास बन रहे 11 मंजिला पैलेसिया आवासीय प्रोजेक्ट में सरकार ने बड़ी गड़बड़ियां मानते हुए उच्च स्तर पर जांच कराने का फैसला किया है। सरकार प्रोजेक्ट की पहली फाइल से लेकर अंतिम मंजूरी देने वाले सभी यूडीएच और जेडीए अफसरों की जांच कराएगी। जांच यूडीएच की जगह अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि अशोक संपतराम को सौंपी गई है। उन्हें दो माह में दोषी अफसरों की सूची और उनकी गड़बडिय़ों का ब्योरा मय प्रमाण देने को कहा गया है। सरकार ने मामले में 9 स्तर पर बड़ी धांधलियां होना माना है।
2009 से 2014 तक के ये अफसर जांच के दायरे में
प्रोजेक्ट को हरी झंडी 2009 में दी गई। 2010 में काम शुरू हुआ। पांच जेडीए कमिश्नर, चार जेडीए जोन एक के उपायुक्त, तीन जेडीए प्रवर्तन शाखा के इंचार्ज, यूडीएच में उपसचिव से लेकर एसीएस स्तर के पांच अफसर इस प्रोजेक्ट की फाइलों को पास करने से संबंधित माने गए हैं। इन 17 अफसरों को सीधे तौर पर पैलेसिया मामले में जिम्मेदार माना जा रहा है। यह संख्या बढ़ भी सकती है।
जांच के ये नौ आधार
> पैलेसिया की जमीन इंस्टीट्यूशनल कार्य के लिए अलॉट की गई थी, आवासीय प्रोजेक्ट की अनुमति किसने दी?
> प्रोजेक्ट में कुछ भाग का भू-उपयोग अभी भी सांस्थानिक है, वह प्रोजेक्ट में कैसे शामिल कर निर्माण शुरू हो गया?
> तीन बार बिना अपनी जमीन के कंपनी ने दूसरी जमीन के नक्शे पेश कर कैसे निर्माण की अनुमति ले ली?
> स्टेच्यू सर्किल पर 15 मीटर ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति है, 30 मीटर ऊंचाई तक निर्माण की मंजूरी कैसे मिली?
> सेट बैक के नियमों का उल्लंघन किया है, फिर भी आज तक रोका क्यों नहीं गया, जिम्मेदार कौन?
> कंपनी ने गरीबों के लिए ईडब्लूएस और एलआईजी के फ्लैट अभी तक बनाए क्यों नहीं?
> यह जमीन कितनी बार बिकी और खरीदी गई। कौन जिम्मेदार है?
> किन अफसरों ने बिना प्रावधानों के रियायतें दे दीं?
> कंपनी के साथ किसकी मिलीभगत, अब तक प्रकरण क्यों नहीं दर्ज कराया गया?
एसीबी में जा सकता है केस
यूडीएच के अफसरों के अनुसार पैलेसिया प्रकरण में जेडीए के अफसरों ने जिस तरह नियमों को ताक पर रख अनुमति प्रदान की और कई जगह गड़बडिय़ां की इसकी जांच सरकार कुछ ही दिन में एसीबी से भी करा सकती है। लेकिन अभी तक इस संबंध में अंतिम निर्णय होना बाकी है।