जयपुर. केंद्र सरकार की ओर से लाए गए जजों की नियुक्ति संबंधी बिल को लेकर किए जाने वाले संविधान संशोधन के संकल्प को राज्य विधानसभा ने बुधवार को मंजूरी दे दी। ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। विधानसभा में ध्वनिमत से संविधान (121वां संशोधन) विधेयक, 2014 एवं राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक 2014 के अनुसमर्थन में लाए गए संकल्प को पारित किया गया।
इस दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी सदन में मौजूद थीं। संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने संकल्प को सदन में प्रस्तुत किया। देश में 1993 से कॉलेजियम व्यवस्था है। इसके तहत जज ही जजों को चुनते हैं। पांच जजों का पैनल बंद कमरे में फैसले लेता है। सरकार किसी नाम पर सिर्फ पुनर्विचार के लिए कह सकती है।
यह होंगे कमीशन के मुख्य अधिकार
-कोर्ट में जजों के पद खाली होने के छह माह पहले ही कमीशन उन्हें भरने की सिफारिश भेजेगा।
-सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के मानदंड, चयन प्रक्रिया और ट्रांसफर प्रक्रिया तय करने का अधिकार इसको रहेगा।
-कमीशन खुद के कामकाज की प्रक्रिया भी तय करेगा।
सरकार ने यह विवादित प्रस्ताव हटाया
-मूल विधेयक में प्रावधान था कि अगर राष्ट्रपति सिफारिश लौटा दें तो दोबारा सिफारिश भेजने के लिए आयोग में सर्वसम्मति जरूरी है।
-कांग्रेस ने यह प्रावधान हटाने की मांग की। इसके बाद यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा सिफारिश लौटाने पर उस पर पुनर्विचार के लिए सर्वसम्मति जरूरी नहीं होगी।
राज्य में इसलिए थी पास कराने की जरूरत
केंद्र सरकार जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर करने वाले कॉलेजियम को खत्म करने के लिए ज्युडिशियल अपॉइंटमेंट बिल लाई है। इस बिल के जरिए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (एनजेएसी) बनाया जा रहा है। यह लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो चुका है। अब देश के आधे राज्यों की विधानसभाओं से इसे पारित कराना जरूरी है। इसी कारण राजस्थान में भी संकल्प पारित कराया गया।