जयपुर. वकीलों के आंदोलन को चलाने के लिए गठित ऑल राजस्थान एडवोकेट्स संघर्ष समिति की मंगलवार को हुई साधारण सभा में जयपुर महानगर डीजे दीपक माहेश्वरी व एडीजे महेन्द्र चौधरी का ट्रांसफर नहीं होने तक उनके कोर्ट का बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को भंग करने की कार्रवाई को भी गैर-कानूनी बताया गया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पांच वकीलों को सदस्यता से बर्खास्त किया, दस को नोटिस दिए।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष करनपाल सिंह, अधिवक्ता विमल चौधरी, मदन मीणा व पूनम चंद भंडारी को वकीलों की एकता तोड़ने का प्रयास करने पर प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों की सदस्यता से आजीवन बर्खास्त कर दिया गया। इन वकीलों के कोर्ट परिसर व बार एसोसिएशन में प्रवेश पर भी पांबदी लगाई है। सभा में इन वकीलों की सनद रद्द करने के लिए बार कौंसिल ऑफ राजस्थान व बार कौंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखने का प्रस्ताव भी पारित किया।
रोजाना की हड़ताल को रोकने के लिए बनाई कमेटी
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष करनपाल सिंह ने कहा कि 15 सदस्यीय कमेटी भविष्य में बिना किसी कारण व रोज-रोज की हड़तालों को रोकने के लिए बनाई गई है। हड़ताल स्थगित करने के गलत तरीके के विरोध में वकीलों ने साधारण सभा बुलाई थी। वकीलों की हड़ताल 65 दिन पहले ही स्थगित हो सकती थी लेकिन इसे लंबा खींचा गया, जिससे आमजन सहित पक्षकारों को हानि हुई।
बिना नोटिस दिए बर्खास्त करना गैर कानूनी: अधिवक्ता पीसी भंडारी ने बताया कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा सीधे ही बर्खास्त करने की कार्रवाई गैर कानूनी है बार की सदस्यता से बर्खास्त करने के लिए साधारण सभा की बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील कुमार शर्मा का कहना है कि बर्खास्तगी से पहले नोटिस व निलंबन की कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
-संघर्ष समिति वकीलों के आंदोलन को चलाने के लिए बनाई थी जो पंजीकृत नहीं है। फिलहाल वकीलों की हड़ताल स्थगित हुई है खत्म नहीं हुई है। ऐसे में संघर्ष समिति का अस्तित्व बना हुआ है और वह भी अनुशासन भंग करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई में सक्षम है।- गोपेश कुम्भज
हाईकोर्ट बार एसो. ने किया पांच वकीलों का निष्कासन
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव भुवनेश शर्मा ने बताया कि असंवैधानिक तरीके से साधारण सभा की बैठक बुलाकर बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी भंग करने की कार्रवाई में शामिल पांच वकीलों विमल चौधरी, करनपाल सिंह, पीसी भंडारी, मदन मीणा व ओंकार सिंह राजपुरोहित को बार से निष्कासित किया गया। इसके अलावा दस वकीलों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है।