जयपुर. विधानसभा में गुरुवार को बारां के आदिवासी इलाकों में कुपोषण से मौत के मामले पर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह के संसदीय
क्षेत्र की घटना पर पक्ष और विपक्ष में आमने-सामने की स्थिति बन गई। राजपा विधायक किरोड़ीलाल मीणा ने यह मामला उठाया। किरोड़ी ने कहा कि बारां के किशनगंज व शाहबाद और उदयपुर में कुपोषण, माल न्यूट्रिशन के कारण बच्चों की मौत हो रही है। स्थिति बहुत गंभीर है और अब तक एक पखवाड़े में आधा दर्जन बच्चों की मौत हो चुकी है। बारां अस्पताल में तो 20 बेड पर 62 बच्चे ऊपर नीचे पड़े हैं। जिसमें 10-12 की हालत बेहद खराब है।
पूर्व सरकार ने जो खाद्य सामग्री की योजनाएं चलाई थीं, उन पर इस सरकार ने अंकुश लगाकर खाने-पीने का बंदोबस्त खत्म करने का काम किया है। किरोड़ी ने कहा कि वहां पीडितों का बयान है कि उनके यहां पूर्व सरकार के समय खाने की राशन सामग्री आती थी, वो अब नहीं आ रही। यह दुर्भाग्य की बात है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह इस क्षेत्र से सांसद हैं। इसके बावजूद वे वहां नहीं गए, न ही किसी जनप्रतिनिधि को भेजा गया।
किसी ने वहां जाकर भी नहीं देखा। इसके जवाब में चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि कुपोषण से कोई मौत ही नहीं हुई। जो दो बच्चों की मौत हुई है, वे पूर्व की बीमारियों से हुई हैं। इसकी जांच हमने पहले ही करा ली है। कुपोषण से मौत की बात कहकर सनसनी नहीं फैलानी चाहिए।
सरकार ने जन कल्याणकारी योजना को बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े चिकित्सालयों में 40 व रेफरल अस्पतालों में 60 कुपोषण केन्द्र बनाए गए हैं। कुपोषण के स्तर-3 एवं 4 के पीड़ित बच्चों को अस्पताल में रखा जाता है और उनके साथ रहने वाले माता-पिता को 130 रुपए प्रतिदिन ऐसे बच्चों के पौष्टिक भोजन के लिए दिए जाते हैं। 6 सितम्बर को समाचार पत्रों के माध्यम से किशनगंज-शाहबाद में दो बच्चों की मृत्यु का मामला सामने आया था। राज्य सरकार ने इस पर तत्काल डॉ. देवेन्द्र शर्मा को वहां भेजा।
इन मामलों की जिला कलक्टर ने जांच की। जांच के दौरान एडीएम शाहबाद, उप निदेशक महिला एवं बाल विकास बारां और मुख्य चिकित्सा अधिकारी बारां ने मृत बच्चों के परिजनों, सरपंच, पूर्व सरपंच एवं पंचों से मुलाकात कर बयान लिए।