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पिछले निगम बोर्ड की समितियों ने 5 मिनट में पास किए कई प्रस्ताव

7 वर्ष पहले
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जयपुर. विकास को लेकर नगर निगम की जिन कमेटियों के गठन के लिए बोर्ड बैठकों में घमासान चला, हंगामे हुए। उनके गठन से शहर को कोई फायदा नहीं मिला। नगर निगम में समितियों की बैठकें भी हुई चेयरमैन ने प्रस्ताव भी पास किए लेकिन क्रियान्वयन नहीं होने से लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका। चार साल पहले 21 अक्टूबर 2010 को निगम की साधारण सभा में 21 समितियां गठित हुई थी। इसमें कार्यकारिणी समिति सहित 15 समितियां भाजपा की बनीं, जबकि 6 समितियां कांग्रेस के पास गईं।
एक्ट में प्रावधान होने से सात समितियां तत्काल प्रभाव में आ गईं। उधर, बोर्ड की कुल 22 बैठकें हुई थीं। इसमें से दो बैठकें सरकार के आदेश पर रखी गई। इनमें भी सिर्फ हंगामें हुए, विकास के मुद्दे गण रहे। शहरवासियों को कुछ नहीं मिला। कुल मिलाकर मेयर, समिति चेयरमैन व बोर्ड के सदस्य फेल साबित हुए।
समितियों के अधिकार क्या
कार्यकारिणी समिति - अपनी धारा के अंतर्गत स्टेट ग्रांट के पट्टे, संपत्ति बेचना व नीलामी, विकास शुल्क तय करना व प्रोजेक्ट की मंजूरी देती है।
वित्त समिति - बजट बनाना और पारित कर बोर्ड में भेजना, कार्यों की वित्तीय स्वीकृति देना।
सफाई व स्वास्थ्य समिति -सफाई, वाच राइडर, चालान करना व दवाइयों के छिड़काव के कार्य।
भवन निर्माण व अनुमोदन समिति - भवन मानचित्र की जांच, अनुमोदन, भू उपांतरण व पुनर्गठन।
गंदी बस्ती सुधार समिति - कच्ची बस्ती विकास, कच्ची बस्तियों के लिए प्लान बनाना, फंड तय करना।
नियम उपनियम समिति - बाइलॉज के संशोधन में सुझाव देना, उपविधियां बनाना, वकीलों की नियुक्ति।
अपराधों का शमन व समझौता समिति - बिल्डिंग में कपाउंड की अनुमति देना, पार्किंग नहीं छोड़ी गई तो नियमन शुल्क तय करना और निगम व जनता के कोर्ट में जा रहे मामले रोकना प्रमुख कार्य है।