जयपुर. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी का कहना है कि मोरपंख के कारोबार को अवैध घोषित करने में सबसे बड़ी रुकावट राजस्थान के जैन समुदाय की तरफ से आ रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को रोकने के लिए राजस्थान के जैन समाज की मेरे पास काफी चिट्ठियां आई। उन्होंने कहा कि जैन समुदाय में मोर के पंखों से मयूर पिच्छिका बनाई जाती है। मौजूदा कानून में मोर पंख का कारोबार लाइसेंस के जरिए किया जाता है लेकिन इसकी आड़ में मोरों का शिकार किया जा रहा है जिससे इनकी संख्या तेजी से घटी है। उन्होंने मोर पंखों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग करते हुए धार्मिक मिथकों को छोड़ने की अपील की।
राजस्थान में पेट शॉप रूल्स बने
गांधी ने राजस्थान में पेट शॉप रूल्स बनाए जाने की मांग की। इस मांग को लेकर उन्होंने रविवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से भी भेंट की।
अन्य राज्यों में बली के लिए भेजे जा रहे हैं ऊंट
मेनका गांधी ने राजस्थान सरकार से इस ओर सतर्क होने का आग्रह किया कि राज्य से हत्या के लिए ऊंट विभिन्न राज्यों और बांग्लादेश ले जाए जा रहे हैं। हाल ही में ईद के दौरान उत्तरप्रदेश के बंदायू जिले में बलि के लिए राजस्थान से ऊंटों को लाया गया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रतिदिन 300 ट्रक जानवरों की हत्या कर दी जाती है। पुलिस, व्यापारियों और राजनेताओं के गठजोड़ से यह हो रहा है। उन्होंने इस प्रकार की अवैध घटनाओं को रोकने के लिए पशु कार्यकर्ताओं को पुलिस-प्रशासन के साथ दोस्ती वाला रवैया रखे जाने की जरूरत बताई। साथ ही बताया कि विभिन्न संगठनों द्वारा चलाए जा रहे गौ आश्रमों के साथ निकट संपर्क रखने की जरूरत है।
मेनका गांधी ने दैनिक भास्कर के ‘एक पेड़ एक जिंदगी’ अभियान की सराहना की। उन्होंने होटल क्लार्क्स आमेर में कचनार का पौधा लगाया। इस अवसर पर टिमी कुमार, पीपुल्स फॉर एनीमल के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू, सूरज
सोनी और चाकसू विधायक लक्ष्मीनारायण मौजूद थे।
आतंक में जाता है पशु वध का पैसा
मेनका गांधी ने कहा कि भारत में अवैध रूप से किए जा रहे पशु वध के पैसे से आतंक की फंडिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में सबसे ज्यादा मांस का अवैध निर्यात भारत से किया जा रहा है। गांधी ने कहा कि अब मिडिल ईस्ट में भारत से दुधारू पशुओं के मांस की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह बहुत चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों को पशुओं के संरक्षण के लिए कठोर कदम उठाए जाने की जरूरत है।
पंख के लिए मोर मारने की जरूरत नहीं : तरुणसागरजी
मेनका गांधी के मोरपंख के लिए मोर के शिकार की बात से जैन समाज ने असहमति जताई है। इस बारे में जैन मुनि-तरुण सागर महाराज का कहना है कि मयूर पिच्छिका जैन संतो की पहचान है। बगैर पिच्छिका के जैन संत 7 कदम भी नहीं चल सकते। पंख के धार्मिक उपयोग के लिए कानून में छूट के प्रावधान हों। उनका कहना है कि मोर साल में एक बार अपने पंख खुद ही छोड़ता है और मोर पंख के लिए उसे मारने की जरूरत नहीं होती।